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Panaji: ‘न्यायाधीश मीडिया के प्रभाव में आकर फैसला नहीं देते’, लोगों के बीच भ्रम पर बोले HC के न्यायमूर्ति

Sat, 07 Oct 2023 03:18 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी

सार

नाइक मडगांव के जीआर कारे कॉलेज ऑफ लॉ में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। यहां छात्रों ने उनसे मीडिया ट्रायल पर उनकी राय पूछी। इस पर नाइक ने कहा कि मीडिया ट्रायल होता है। हालांकि,  न्यायाधीश इससे प्रभावित होते हैं।
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HC Judge PD Naik - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश प्रकाश डी नाइक ने कहा कि न्यायाधीश मीडिया के प्रभाव में आकर अपना फैसला नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों में मीडिया को लेकर धारणा बनी हुई है कि वह किसी भी केस में ज्यादा ही शामिल हो जाती है। अदालत के फैसले का इंतजार करने की बजाय पहले ही अपना निर्णय सुना देती है। उन्होंने कहा कि लेकिन इन सबसे न्यायाधीश प्रभावित नहीं होते हैं। हम हमेशा अपना फैसला सुनवाई और सबूतों के आधार पर देते हैं। 

दरअसल, नाइक मडगांव के जीआर कारे कॉलेज ऑफ लॉ में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। यहां छात्रों ने उनसे मीडिया ट्रायल पर उनकी राय पूछी। इस पर नाइक ने कहा, ‘मीडिया ट्रायल होता है। हालांकि मैं यह नहीं कहूंगा कि न्यायाधीश मीडिया से प्रभावित होते हैं।’

उन्होंने कहा कि आम जनता का कहना है कि मीडिया अदालत में मुकदमा चलाने से पहले ही अपना फैसला सुना देती है। जबकि वह इस हद तक नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि कभी-कभी अदालत में जाने से पहले गवाहों का इंटरव्यू लिया जाता है। इस पर कहा जाता है कि इस तरह के मीडिया ट्रायल का सुनवाई पर असर पड़ता है। 

नाइक ने कहा, ‘जहां तक मेरा सवाल है, मैं हमेशा तथ्यों के आधार पर चलूंगा। प्रत्येक न्यायाधीश को सबूतों और सुनवाई के आधार पर ही फैसला देना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि न्यायाधीश मीडिया से प्रभावित नहीं होते हैं। 

मूल रूप से गोवा के नाइक काम के लिए मुंबई चले गए थे। उन्होंने उन दिनों को याद किया जब उन्होंने अभ्यास करना शुरू किया था। उन्होंने कहा, ‘मुझे याद है कि मेरे दिनों में कानूनी पेशे को महत्व नहीं दिया जाता था। लोग सोचते थे कि यह फायदेमंद नहीं है। उन दिनों मेरे घर पर टेलीफोन नहीं था। मैं अपने मुवक्किल से बात करने के लिए सार्वजनिक बूथ पर जाता था।’

उन्होंने कहा कि पहले के लोगों की धारणा बताऊं तो एक दिन बूथ के एक कर्मचारी ने पूछा कि क्या इस पेशे में कुछ मिलता भी है। उन्होंने कहा कि आप इससे ही समझिए कि पहले कानूनी पेशे के बारे में लोग क्या सोचते थे। 

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