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Kejriwal's Bail: 'जल्दी में थे जज, इसलिए जमानत का विरोध करने का नहीं दिया मौका', सुप्रीम कोर्ट से बोली ईडी

Wed, 26 Jun 2024 07:36 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

Kejriwal's Bail: ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कथित आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जल्दबाजी में थे और इस वजह से उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत का विरोध करने के लिए अभियोजक को उचित अवसर नहीं दिया। 
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जल्दी में थे जज- सुप्रीम कोर्ट से बोली ईडी - फोटो : ANI
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विस्तार
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कथित आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केजरीवाल को नियमित जमानत देने वाले ट्रायल कोर्ट का 20 जून का आदेश धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत पहले से अनिवार्य शर्तों का पालन न करने के कारण अनुचित था। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की अवकाश पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 21 जून को दिए गए अंतरिम स्थगन को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका में दायर प्रवर्तन निदेशालय के जवाबी हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया। 
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महत्वपूर्ण अपील दायर करेंगे केजरीवाल के वकील
इस दौरान पीठ ने केजरीवाल को अपनी याचिका वापस लेने की भी अनुमति दी, क्योंकि उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वे एक महत्वपूर्ण अपील दायर करेंगे, क्योंकि उच्च न्यायालय ने 25 जून को जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए अंतिम आदेश सुनाया है। वहीं शीर्ष अदालत ने केजरीवाल को महत्वपूर्ण अपील दायर करने की स्वतंत्रता दी।

पीएमएलए की धारा 45 में अनिवार्य हैं दो शर्तें
इस दौरान अपने हलफनामे में, ईडी ने बताया कि पीएमएलए की धारा 45 में दो अनिवार्य शर्तें हैं - सरकारी वकील को जमानत का विरोध करने का अवसर दिया जाना चाहिए और जहां सरकारी वकील जमानत आवेदन का विरोध करता है, तो अदालत को खुद को संतुष्ट करना होगा कि यह मानने के लिए उचित आधार मौजूद हैं कि आरोपी ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए उसके कोई अपराध करने की संभावना नहीं है। जबकि 20 जून के आदेश को खारिज करने की मांग करते हुए याचिका में कहा गया है, इस मामले में अभियोजन एजेंसी ने विशिष्ट और संक्षिप्त कथनों के साथ विशिष्ट आधार उठाया है, जिससे पता चलता है कि ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश जल्दबाजी में थे और उन्होंने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को जमानत का विरोध करने का उचित अवसर नहीं दिया।
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मनी लॉन्ड्रिंग एक विशिष्ट और गंभीर अपराध- ED
इस पर जांच एजेंसी ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग एक विशिष्ट और गंभीर अपराध है, इसलिए जमानत दिए जाने या न दिए जाने की स्थिति में पीएमएलए के तहत आवश्यकताएं दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों को दरकिनार कर देती हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि जमानत के लिए आवेदन पर विचार करने वाली अदालत को अपनी संतुष्टि दर्ज करनी चाहिए, जो अदालत की तरफ से बनाए गए इस विश्वास पर आधारित होनी चाहिए कि आरोपी ऐसे अपराध का दोषी नहीं है। जांच एजेंसी ने आगे कहा कि इसका मतलब अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड, जांच के कागजात, दर्ज की गई शिकायत की जांच करना होगा, क्योंकि ऐसे रिकॉर्ड के जांच के आधार पर ही अदालत इस उचित फैसले पर पहुंच सकती है कि आरोपी मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का दोषी नहीं है।

एजेंसी ने कहा- अगर इन सभी पूर्व-आवश्यक अनिवार्य शर्तों में से किसी का भी अनुपालन नहीं किया जाता है, तो आदेश अधिनियम की धारा 45 के अधिदेश का गैर-अनुपालन होगा और केवल उसी आधार पर उल्लंघन होगा। जबकि उल्लंघन अनिवार्य शर्तों के गैर-अनुपालन के अलावा अन्य आधारों पर भी हो सकता है। ईडी ने कहा कि यह महज अभियोजन एजेंसी की दलील नहीं है, बल्कि यह एक स्वीकृत तथ्य है कि अभियोजन एजेंसी की तरफ से विशेष रूप से अनुरोध किए जाने के बावजूद ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश ने मामले के रिकॉर्ड की जांच नहीं की।

आदेश जल्दबाजी में किया गया पारित- ED
ईडी ने बताया कि 20 जून को ट्रायल कोर्ट के समक्ष जमानत की सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश की तरफ से लगातार अपनी दलीलें संक्षिप्त करने के लिए कहा गया था। ईडी ने कहा कि आरोपित आदेश से भी यह पता चलता है कि आदेश जल्दबाजी में और निश्चित रूप से मामले के रिकॉर्ड को देखे बिना पारित किया गया है। यह सच है कि सुनवाई का अवसर शब्द को किसी विशेष समय सीमा के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह सभी मामले के सबूतों पर निर्भर करेगा। एजेंसी ने कहा कि ये सभी सबूत दर्शाते हैं कि पीएमएलए की धारा 45 के तहत अनिवार्य शर्तों का गैर-अनुपालन करने के अलावा, जमानत आदेश के सबूत और कानून दोनों के आधार पर विपरीत है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

21 मार्च को गिरफ्तार किए गए थे केजरीवाल
बता दें कि इससे पहले बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी घोटाले के सिलसिले में सीबीआई को केजरीवाल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करने की अनुमति दी थी। जबकि आप नेता को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था और 20 जून को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी। वहीं अपने जमानत आदेश में ट्रायल कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया केजरीवाल का अपराध अभी साबित नहीं हुआ है और ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपराध की आय से उन्हें जोड़ने वाले प्रत्यक्ष सबूत पेश करने में विफल रहा है।
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