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सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस मेहता ने CJI को लिखी चौथी चिट्ठी, राजस्थान के चीफ जस्टिस पर लगाए गंभीर आरोप; क्या कहा?

Mon, 07 Sep 2026 05:43 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर CJI को चौथी चिट्ठी लिखी है। पत्र में न्यायिक जांच में कथित हस्तक्षेप और गोपनीयता भंग करने के आरोप लगाए गए हैं।

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जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का मामला - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को एक और पत्र लिखा है। यह जस्टिस मेहता की ओर से CJI को भेजी गई चौथी चिट्ठी है। इसमें उन्होंने जस्टिस शर्मा पर न्यायिक जांच में दखल देने, गोपनीयता भंग करने और प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
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जस्टिस मेहता इससे पहले 2, 10 और 17 अगस्त को भी CJI को पत्र लिख चुके हैं। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर कथित तौर पर कुप्रशासन, अनियमितता, भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगाए थे। जस्टिस शर्मा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया था।

जस्टिस मेहता ने चौथी चिट्ठी में क्या आरोप लगाए?

30 अगस्त को लिखे पत्र में जस्टिस मेहता ने कहा कि उनके पास जस्टिस शर्मा के कथित मनमाने और प्रशासनिक स्तर पर अनुचित फैसलों से जुड़ी 'आगे की जानकारी और सामग्री' है। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में नियमों में कथित मनमाने बदलाव, जमीन विवाद में न्यायिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार तथा प्रशासनिक व्यवस्था में गड़बड़ी जैसे आरोप भी दोहराए। उनका ताजा पत्र मुख्य रूप से हाईकोर्ट की एक आंतरिक न्यायिक जांच से जुड़ा है।

किस न्यायिक जांच में दखल का आरोप लगाया गया?

  • जस्टिस मेहता के मुताबिक, राजस्थान हाईकोर्ट में एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ शिकायत की जांच के लिए एक समिति बनाई गई थी।
  • इस अधिकारी पर एक महिला अधिकारी के मोबाइल पर आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाने का आरोप था।
  • जस्टिस मेहता ने पत्र में कहा कि समिति में राजस्थान हाईकोर्ट की तीन महिला जज शामिल थीं।
  • उनके मुताबिक, समिति ने 21 मई 2026 और 9 जुलाई 2026 को पारित प्रस्तावों में दर्ज किया कि तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शर्मा ने जांच की कार्यवाही में सीधे हस्तक्षेप किया।

जांच समिति ने क्या आपत्ति जताई थी?

जस्टिस मेहता के दावे के अनुसार, समिति का मानना था कि इस हस्तक्षेप से जांच की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और पूरी जांच की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संवेदनशील जांच की गोपनीयता भंग हुई। पत्र में दावा किया गया कि समिति के रिकॉर्ड रजिस्ट्री के दूसरे अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के साथ साझा किए गए। जस्टिस मेहता के मुताबिक, इसी वजह से समिति ने आगे जांच की कार्यवाही बढ़ाने से इनकार कर दिया।

पहले की चिट्ठियों में जस्टिस मेहता ने क्या कहा था?

जस्टिस मेहता ने अगस्त में भेजी गई अपनी तीन चिट्ठियों में जस्टिस शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें कथित कुप्रशासन, अनियमितता, भाई-भतीजावाद और पक्षपात शामिल थे। उन्होंने CJI से राजस्थान हाईकोर्ट के लिए राज्य के बाहर से स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का भी आग्रह किया था। जस्टिस शर्मा ने इन आरोपों को आधारहीन बताया था।

CJI सूर्यकांत ने आरोपों पर क्या कहा था?

26 अगस्त को CJI सूर्यकांत ने कहा था कि जस्टिस मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों का फैसला सार्वजनिक मंच पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित जज को निष्पक्ष अवसर दिया जाना चाहिए। ऐसे में जस्टिस मेहता की चौथी चिट्ठी के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश कब हुई?
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। यह घटनाक्रम जस्टिस मेहता की ओर से जस्टिस शर्मा को लेकर CJI को पत्र लिखे जाने के बीच सामने आया है।

जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस शर्मा का न्यायिक सफर क्या रहा है?
  • जस्टिस संदीप मेहता को मई 2011 में राजस्थान हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।
  • फरवरी 2023 में वह गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और उसी साल नवंबर में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया।
  • जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा नवंबर 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट के जज बने थे। जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना हाईकोर्ट कर दिया गया था।
  • स्वास्थ्य कारणों से राजस्थान वापसी का उनका अनुरोध मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने स्वीकार नहीं किया था।
  • इसके बाद उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भेजा गया। मई 2025 में कॉलेजियम ने उन्हें राजस्थान वापस भेजने की सिफारिश की थी।
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