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जज लोया मौत मामले की नहीं होगी SIT जांच, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को लताड़ा

Thu, 19 Apr 2018 12:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Judge Loya
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जज लोया की मौत स्वाभाविक थी या उनकी हत्या की गई थी इसकी निष्पक्ष जांच की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एसआईटी से जांच नहीं कराई जाएगी, साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को लताड़ते हुए यह भी कहा कि इससे पहले जज लोया मामले में जजों के फैसलों पर शक नहीं किया जा सकता है। यह याचिका जजों की छवि को खराब करने की कोशिश है।  तीन जजों की बेंच ने कहा कि जनहित याचिकाएं जरूरी है लेकिन इसका दुरुपयोग चिंताजनक है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपने फैसले में क्या-क्या कहा...
  • कोर्ट ने माना कि जस्टिस लोया की मौत प्राकृतिक थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने PIL के दुरुपयोग की आलोचना की और कहा कि  PIL का दुरुपयोग चिंताजनक है। 
  • याचिकाकर्ता को डांटते हुए कहा कि इस तरह की पीआईएल का उद्देश्य जजों को बदनाम करना है और यह न्यायपालिका पर सीधा हमला है।
  • कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायालय राजनीति का अखाड़ा नहीं, राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं को लोकतंत्र के सदन में ही सुलझाना होगा।
  • तीन जजों की बेंच में मुख्यन्यायाधीश दीपक मिश्र ने कहा कि यह पीआईएल  शरारत भरी है इसका उद्देश्य भी साफ नहीं हो रहा है यह आपराधिक अवमानना है।
  • अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि हम उन न्यायिक अधिकारियों के बयानों पर संदेह नहीं कर सकते, जो जज लोया की मृत्यु के समय उनके साथ थे। 

 इससे पहले शीर्ष न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से जज लोया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश करने को कहा था। जज लोया की मौत 2014 में संदेहास्पद परिस्थिति में हुई थी। पहली नजर में पूरा मामला बहुत ही गंभीर लगा था। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार न्यायाधीश लोया की मौत  2014 में नागपुर में  दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई थी जब वह अपने दोस्त की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे। 
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जज लोया मौत मामले की सु्प्रीम कोर्ट के फैसले पर पूर्व महाधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि इन याचिकाकर्ताओं ने कानून का ध्यान नहीं रखा।इनका मकसद मौजूदा सरकार में काम कर रहे वरिष्ठ  लोगों पर हमला करना और उनकी छवि खराब करना है। पूरे मामले में जजों के फैसलों पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता है। रोहतगी ने यह भी कहा कि यह याचिका जनहित के लिए नहीं बल्कि निजी हित के लिए लगाई गई थी।

बता दें कि कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, पत्रकार बीएस लोने, बांबे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य द्वारा विशेष जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिकाओं पर 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।
 
सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा 12 जनवरी को किए गए प्रेस कांफ्रेंस की तात्कालिक वजह लोया केस की सुनवाई के लिए चुनी गई पीठ थी। हालांकि बाद में उस पीठ ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया था और इसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई थी। 
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