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SC: जज हिमा कोहली ने कहा- AI को खतरे के रूप में नहीं बल्कि गुणवत्ता बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए

Sun, 12 Feb 2023 02:29 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट की जज हिमा कोहली ने कहा कि जब हम प्रौद्योगिकी को अपनाते हैं, तो यह अनिवार्य है कि हम उन नैतिक चिंताओं से अवगत हों जो अदालतों में एआई के उपयोग से आती हैं। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग पक्षकारों के अधिकारों के प्रति जवाबदेही, पारदर्शिता और सुरक्षा के बारे में चिंता पैदा करता है।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट की जज हिमा कोहली ने शनिवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial intelligence) को एक खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि कानूनी अभ्यास की गुणवत्ता को बढ़ाने के एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए क्योंकि तकनीक ने कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान और उसके बाद भी न्याय प्रक्रिया को चालू रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

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हालांकि न्यायमूर्ति कोहली ने जवाबदेही, पारदर्शिता और पार्टियों के अधिकारों की सुरक्षा के बारे में नैतिक चिंताओं को चिह्नित किया, जो कानूनी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग से पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब हम प्रौद्योगिकी को अपनाते हैं, तो यह अनिवार्य है कि हम उन नैतिक चिंताओं से अवगत हों जो अदालतों में एआई के उपयोग से आती हैं। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग पक्षकारों के अधिकारों के प्रति जवाबदेही, पारदर्शिता और सुरक्षा के बारे में चिंता पैदा करता है।

स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल स्थापित करना महत्वपूर्ण
शीर्ष अदालत की न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने यहां आईसीआईसीआई बैंक द्वारा आयोजित एक समारोह में कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा कि सभी पक्षों को समान रूप से न्याय मिले। 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड द लीगल सेक्टर' विषय पर बोलते हुए न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि एआई का उपयोग कानूनी क्षेत्र में "गेम-चेंजर" साबित हुआ है और इसमें वकीलों के काम करने के तरीके में क्रांति लाने की क्षमता है।
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एआई को खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए: कोहली
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन ने कानूनी बिरादरी के बीच कुछ चिंताएं पैदा कर दी हैं। वकीलों को डर हो सकता है कि उनकी विशेषज्ञता और कौशल को प्रौद्योगिकी द्वारा अनावश्यक बना दिया जाएगा। हालांकि, मेरे विचार से एआई को एक खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि निम्नलिखित कारणों से कानूनी अभ्यास की गुणवत्ता बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति कोहली ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होने वाले लाभ के कई पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं इस इस ओर आपका ध्यान दिलाना चाहती हूं कि एआई में नियमित कार्यों को स्वचालित करके, कानूनी अनुसंधान के लिए आवश्यक समय को कम करके और सूचना तक वास्तविक समय पहुंच प्रदान करके कानूनी अभ्यास की दक्षता में काफी सुधार करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि यह वकीलों के लिए जटिल और मूल्य वर्धित कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अधिक समय और स्थान बना सकता है, जिससे अंततः उनके मुवक्किलों को बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। 

दूसरी बात यह है कि एआई सिस्टम बड़ी मात्रा में आंकड़े का विश्लेषण कर सकता है और पैटर्न और संबंधों की पहचान कर सकता है, जो मनुष्य के लिए तुरंत जाहिर करना संभव नहीं हो सकता है। इससे निर्णय लेने में सटीकता बढ़ेगी और मुवक्किलों को बेहतर परिणाम मिलेंगे। तीसरा, एआई का उपयोग मुवक्किलों को सूचना, व्यक्तिगत अनुशंसाओं और आभासी कानूनी सहायता तक त्वरित पहुंच प्रदान करने के लिए किया जा सकता है। न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि यह मुवक्किलों के व्यापक अनुभव में सुधार करता है और दीर्घकालिक संबंध बनाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि आखिरकार मैं कहना चाहती हूं कि कानूनी पेशे में एआई के एकीकरण में नए कानूनी-तकनीकी उत्पादों और सेवाओं के विकास सहित नए व्यावसायिक अवसर पैदा करने की क्षमता है।

प्रौद्योगिकी में मानवीय सहानुभूति, करुणा और तर्क की कमी: कोहली
न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई की भूमिका कानूनी दुनिया को आकार देने और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बाध्य है। हालांकि, कानूनी क्षेत्र में एआई के उपयोग करने की आवश्यकता पर बल देते हुए न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि प्रौद्योगिकी में मानवीय सहानुभूति, करुणा और तर्क की कमी होगी, जो न्याय के लिए आवश्यक हैं और इसके लिए न्यायाधीशों की आवश्यकता होगी।

शीर्ष अदालत की न्यायाधीश ने कहा कि विकास की कोई सीमा नहीं है क्योंकि मानव बुद्धि और कल्पना की कोई सीमा नहीं है और आखिरकार एआई मानव जाति का ही निर्माण है।आईसीआईसीआई बैंक की कानूनी टीम ने अपने उपभोक्ताओं की सुविधा और बैंकिंग विवादों से निपटने के लिए एक ज्ञान-साझाकरण मंच "आई-एमिकस" बनाया है।

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