देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में जांची गई 1.16 लाख दवा नमूनों में से 3,104 सैंपल गुणवत्ता में असफल पाए गए, जबकि 245 दवाओं को नकली या मिलावटी घोषित किया गया। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने सदन में दी। इन आंकड़ों ने दवा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
नड्डा ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भी स्थिति चिंताजनक रही है। 2023-24 में 1.06 लाख नमूनों में से 2,988 गुणवत्ता मानक पर खरे नहीं उतरे, जबकि 282 नकली या मिलावटी पाए गए। 2022-23 में जांचे गए 96,173 नमूनों में 3,053 सैंपल घटिया गुणवत्ता के और 424 नकली पाए गए। यानी लगातार तीन वर्षों से बड़ी संख्या में दवाएं मानकों पर फेल होती रही हैं।
FSSAI और राज्यों की एजेंसियों की कार्रवाई
उन्होंने बताया कि गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लागू कराने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) तथा राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के फूड सेफ्टी विभाग नियमित निगरानी, निरीक्षण और रैंडम सैंपलिंग करते हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत की जाती है।
CDSCO की जोखिम आधारित जांच
दवा निर्माण इकाइयों के निरीक्षण को मजबूत करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने राज्य नियामकों के साथ मिलकर दिसंबर 2022 से जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू किया। जिन कंपनियों के अधिक सैंपल फेल मिले, जिन पर शिकायतें आईं या जिनके उत्पाद अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी के हैं। उन्हें प्राथमिकता से जांचा गया।
960 से ज्यादा प्रांगण की जांच
नड्डा ने बताया कि अब तक 960 से अधिक दवा निर्माण और परीक्षण इकाइयों का निरीक्षण किया गया है। जांच के बाद राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने 860 से अधिक कड़े कदम उठाए हैं। इनमें शो-कॉज नोटिस, चेतावनी पत्र, उत्पादन बंद करने के आदेश और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई शामिल है। यह कार्रवाई दवा नियम 1945 के प्रावधानों के तहत की गई है।
ये भी पढ़ें- अरुणाचल हादसा: खाई से चमत्कारिक रूप से बचा इकलौता मजदूर, अस्पताल में लड़ रहा मौत से जंग, जानें कैसी है हालात?
'ड्रग अलर्ट' में जारी होती है सूची
सभी फेल, नकली या मिलावटी दवाओं की सूची समय-समय पर CDSCO की वेबसाइट पर ‘ड्रग अलर्ट’ सेक्शन में जारी की जाती है। इसके साथ ही संबंधित कंपनियों के खिलाफ हुई कार्रवाई भी सार्वजनिक की जाती है। यह सूची स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अहम हिस्सा मानी जाती है।
राज्यों की प्रयोगशालाओं को मिल रही मजबूती
नड्डा ने कहा कि सरकार दवा नियामक तंत्र को मजबूत करने के लिए राज्यों की प्रयोगशालाओं और दवा नियंत्रण कार्यालयों को आधुनिक बना रही है। इसके लिए केंद्र प्रायोजित योजना ‘SSDRS’ लागू की गई है, जिसके तहत राज्यों को वित्तीय सहायता दी जा रही है।
756 करोड़ रुपये जारी, नई लैबों का निर्माण
इस योजना के तहत अब तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 756 करोड़ रुपये केंद्र की ओर से दिए जा चुके हैं। इन पैसों से 17 नई दवा परीक्षण प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं, जबकि 24 पुरानी लैबों को अपग्रेड किया गया है। इससे दवाओं की गुणवत्ता की जांच क्षमता में बड़ा सुधार आया है।
बाजार में सुरक्षित दवाएं सुनिश्चित करना
सरकार का कहना है कि इन कदमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में बिकने वाली हर दवा सुरक्षित और गुणवत्ता वाली हो। दवाओं की निगरानी व्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है ताकि नकली और घटिया दवाओं को बाजार से हटाया जा सके। लगातार फेल हो रहे सैंपल दवा उद्योग पर भी दबाव बढ़ा रहे हैं। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि मानकों से खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अन्य वीडियो-