चंद्रयान-2 से इसरो मुख्यालय का संपर्क लैंडिंग के आखिरी कुछ मिनटों में टूट गया। इसरो चीफ के सिवन ने बताया कि चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले विक्रम लैंडर से हमारा संपर्क टूट गया।इसरो मुख्यालय में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को हिम्मत देते हुए कहा कि आपने जो किया, वह कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि आप छोटी-छोटी गलतियों से सीखते हैं। आपने देश की और मानव जाति की बड़ी सेवा की है।
आइए एक नजर में देखते हैं चंद्रयान-2 का अब तक का पूरा सफर...
- मिशन चंद्रयान-2 की नींब नवंबर 2007 में ही पड़ गई थी, जब चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट पर साथ काम करने के लिए इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस के बीच अनुबंध हुआ था।
- सितंबर 2008- तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में सरकार ने चंद्रयान-2 मिशन के लिए अपनी मंजूरी दी।
- अगस्त 2009- इसरो और रॉसकॉसमॉस ने मिलकर चंद्रयान-2 का डिजाइन तैयार कर लिया और इसकी लॉन्चिंग जनवरी 2013 में तय की गई।
- 2013-2016- रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस द्वारा लैंडर तैयार करने में लगातार देरी किए जाने की वजह से मिशन टलता रहा। आखिरकार उसने लैंडर देने में असमर्थता जताते हुए मिशन से हाथ खींच लिया। जिसके बाद इसरो ने खुद ही लैंडर बनाने का फैसला किया। चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है।