राजधानी दिल्ली के कॉस्टीट्यूशन क्लब में शनिवार शाम को वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर की पुण्यतिथि की संध्या पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यादों में आलोक नाम से आयोजित कार्यक्रम में 'भारतः बदलाव की इबारत' विषय पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में परिसंवाद का संचालन आईआईएमसी के प्रोफेसर आनंद प्रधान ने किया। वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफा ने अपने संबोधन में इस बात पर आश्चर्य जताया कि धर्मनिरपेक्षता शब्द अब एक गंदा शब्द बना दिया गया है। जबकि यह हमारे संविधान के सबसे पवित्र शब्दों में से एक है।
इतिहासकार प्रोफेसर आदित्य मुखर्जी ने देश में राजनीतिक कट्टरता के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और कहा कि हिंदू राष्ट्रवाद एक गलत शब्द प्रयोग है। यह राष्ट्रवाद का विलोम है। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद समावेशी राष्ट्रवाद है। उसे किसी एक धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता।
वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने कहा कि पत्रकार आज जैसे प्रश्न पूछना भूल गए हैं। उन्होंने भी उग्र हिंदुत्व के बढ़ते आग्रहों पर चिंता जताई। जनसत्ता में वर्षों तक आलोक तोमर के साथ काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार उमेश जोशी ने आलोक के व्यक्तित्व से जुड़े कई संस्मरण पेश किए। कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राजधानी के अनेक संपादक और बुद्धिजीवी मौजूद रहे।