भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य के युद्ध के हिसाब से मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में उच्चस्तरीय संयुक्त ऑपरेशन सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दो दिवसीय रक्षा सम्मेलन में थल, वायु और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मकसद बदलते युद्ध स्वरूप के बीच तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और संयुक्त लड़ाकू क्षमता को मजबूत करना रहा। सम्मेलन में इंटीग्रेटेड वॉरफाइटिंग यानी संयुक्त युद्ध संचालन को भविष्य की जरूरत बताया गया।
क्या है संयुक्त ऑपरेशन सम्मेलन का उद्देश्य?
यह सम्मेलन 5 और 6 फरवरी को आयोजित किया गया। इसकी मेजबानी पश्चिमी वायु कमान मुख्यालय ने की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसका उद्देश्य ऑपरेशन स्तर पर सेनाओं के भीतर और सेनाओं के बीच तालमेल को गहरा करना है। आज का युद्ध केवल जमीन या आसमान तक सीमित नहीं है। अब युद्ध कई क्षेत्रों में एक साथ लड़ा जाता है। इसे मल्टी-डोमेन वातावरण कहा जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संयुक्त तैयारी पर जोर दिया गया।
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ऑल डोमेन जॉइंट ऑपरेशंस ढांचे पर जोर
यह पूरा आयोजन ऑल डोमेन जॉइंट ऑपरेशंस एक्सरसाइज 2026 फ्रेमवर्क के तहत किया गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह पहल भविष्य के लिए तैयार संयुक्त सेना बनाने की दिशा में अहम कदम है। इसका लक्ष्य ऐसी फोर्स तैयार करना है जो जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में एक साथ काम कर सके। मंत्रालय ने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों के लिए संयुक्तता और ऑपरेशनल तालमेल की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
वायुसेना अधिकारियों ने क्या कहा
पश्चिमी वायु कमान के वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी एयर मार्शल जे एस मान ने कहा कि आज और आने वाले समय के युद्ध में संयुक्तता सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि एयर, लैंड, सी, स्पेस और साइबर डोमेन के बीच बिना रुकावट तालमेल जरूरी है। इससे कठिन परिस्थितियों में भी निर्णायक नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने सेवाओं के बीच बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी, तेज निर्णय प्रक्रिया और सेंसर से हथियार तक त्वरित लिंक मजबूत करने पर जोर दिया।
इंटीग्रेटेड प्लानिंग और खुफिया साझाकरण पर फोकस
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने संयुक्त योजना, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता प्राथमिकता तय करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच एक जैसी सोच और समन्वित प्रतिक्रिया जरूरी है। भविष्य की आपात स्थितियों के लिए पहले से तैयारी और क्षमता की कमी की पहचान जरूरी है। उन्होंने त्रि-सेवा संसाधनों के बेहतर उपयोग और संयुक्त रणनीतिक तैयारी पर जोर दिया।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक
पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबकों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में एयर पावर की भूमिका निर्णायक होगी। जमीनी अभियान और हवाई हमलों के बीच तालमेल जरूरी है। स्टैंड ऑफ हथियारों के इस्तेमाल को रणनीतिक बढ़त बताया गया। उन्होंने 1971 जैसे पुराने नुकसान आधारित मॉडल से हटकर तेज, लचीले और पूरी तरह संयुक्त युद्ध मॉडल अपनाने की बात कही।
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