भारतीय सेना सरहद पर संयुक्त सैन्य अभ्यास करने वाली है। सरकार ने सैन्य अभ्यास 'त्रिशूल' से पहले नोटम जारी किया है। इसके तहत 12 दिन तक वायुसीमा में प्रवेश पर पाबंदियां लागू की जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभ्यास के लिए चुना गया क्षेत्र इस बार काफी बड़ा और असामान्य है। इस खबर में जानिए NOTAM से जुड़ा विवरण
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़े भारत-पाकिस्तान तनाव को देखते सरहद पर तीनों सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए नोटम जारी किया है। गुजरात-राजस्थान की सरहद पर सर क्रीक से लेकर जैसलमेर तक सेना, वायुसेना और नौसेना का यह अभ्यास 30 अक्तूबर से 10 नवंबर तक चलेगा। नोटम दरअसल उड़ान क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए जारी किया जाता है।
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अभ्यास के लिए चुना गया क्षेत्र इस बार काफी बड़ा और असामान्य!
जियो-इंटेलिजेंस सैटेलाइट इमेज विशेषज्ञ डेमियन साइमन द्वारा साझा की गई सैटेलाइट तस्वीरों में यह क्षेत्र साफ दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अभ्यास के लिए चुने गए क्षेत्र इस बार काफी बड़ा और असामान्य है। इस सैन्य अभ्यास के दौरान 28,000 फीट तक का एयरस्पेस सुरक्षित रखा जाएगा, यानी इस ऊंचाई तक कोई सामान्य विमान उड़ान नहीं भर सकेगा।
अभ्यास में दक्षिणी कमान के सैनिक भी शामिल होंगे
वायुसीमा को लेकर पाबंदियों का मकसद सैन्य गतिविधियों को सुरक्षित और निर्बाध तरीके से अंजाम देना है। तीनों सेना का संयुक्त अभ्यास त्रिशूल के नाम से होगा। इस अभ्यास का मकसद भारत की संयुक्त क्षमता, आत्मनिर्भरता और नवाचार प्रदर्शन है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस अभ्यास में दक्षिणी कमान के सैनिक चुनौतीपूर्ण इलाकों में संयुक्त सैन्य अभियानों का प्रदर्शन करेंगे।
क्या है भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर?
गौरतलब है कि भारतीय सेना ने विगत 6-7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी दहशतगर्दों के नौ ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में इसी साल 22 अप्रैल को हुए कायराना आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा के भीतर आतंकी संगठनों- लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के केंद्रों को जमींदोज कर दिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया कि इस सैन्य कार्रवाई के दौरान कम से कम 100 आतंकी मारे गए। सेना की इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच चार-पांच दिनों तक काफी तनावपूर्ण स्थिति रही थी। बाद में दोनों देशों के सैन्य महानिदेशक स्तरीय बातचीत के बाद गोलाबारी बंद करने पर सहमति बनी थी।