राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जोधपुर के ओसियां में हुए हत्याकांड का स्वतः संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, कांग्रेस की महिला विधायक दिव्या मदेरणा ने घटना को लेकर अपनी ही सरकार को घेरते हुए कहा कि यहां तो मैं खुद भी असुरक्षित हूं। पुलिस कस्टडी में मुझ पर हमला हुआ लेकिन आरोपी आज भी खुले में घूम रहे हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर जोधपुर के ओसियां विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की विधायक दिव्या मदेरणा ने कहा, खुद ही सुरक्षित नहीं हूं। पुलिस सुरक्षा में हमला हो चुका है। हमले के आरोपी आज भी खुले घूम रहे हैं। उन्होंने कहा, इस मामले को विधानसभा में उठाना चाहा, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने जोधपुर रेंज के आईजी जयनारायण शेर पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा, वे दिनभर अपने वातानुकूलित कमरे में बैठे रहते हैं। उन्हें थानेदारों के तबादलों से ही फुर्सत नहीं मिलती। ऐसे अक्षम अधिकारियों को जिम्मेदारी भरे पदों से हटाकर पुिलस हेडक्वार्टर (पीएचक्यू) में बैठाया जाना चाहिए। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्वीट कर घटना की कड़ी निंदा करते हुए राजस्थान के डीजीपी से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। वहीं, बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने भी घटना की निंदा की है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा-घटना पर कांग्रेस और राहुल खामोश क्यों
राजस्थान में एक के बाद एक अपराधों पर कांग्रेस और राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठाने लगे हैं। ट्विटर यूजर मितेश जैन कहते हैं, राहुल गांधी मणिपुर की बात कर रहे हैं, लेकिन राजस्थान और पश्चिम बंगाल को लेकर खामोश हैं। आखिर ऐसा क्या है, जो राहुल गांधी राजस्थान में हो रहे अपराधों पर चर्चा करने से डरते हैं।
दक्षिण एशिया विश्वविद्यालय की शोध छात्रा मोनिका वर्मा कहती हैं। मणिपुर की घटना व्यथित करने वाली है। लेकिन, राजस्थान की घटना भी कमतर नहीं है। इधर प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक घटना की निंदा कर रहे हैं, लेकिन राजस्थान में अपराध और पश्चिम बंगाल में हिंसा पर वहां सत्ता में मौजूद लोग खामोश क्यों हैं। वहीं, ऋषि बागरी कहते हैं, भाजपा नेता और समर्थक मणिपुर की घटना पर अपना आक्रोश जता रहे हैं। लेकिन, राजस्थान और पश्चिम बंगाल की सरकार हिंसा को लेकर पूरी तरह खामोश हैं।