बढ़ता वायु प्रदूषण, समय पर ऑफिस पहुंचने की चिंता, कर्ज का बढ़ता बोझ, ट्रैफिक जाम की चिल्ल-पों, बढ़ती बेरोजगारी, टार्गेट पूरा करने की चिंता, सार्वजनिक परिवहनों की कमी, महंगाई और बढ़ती असुरक्षा की भावना लोगों को बीमार कर रही है। और इस बीमारी मे अव्वल है दिल्ली वाले क्योंकि ये भागमभाग वाली जिंदगी दिल्ली में रहने वालों को तनाव दे रही है।
ये तनाव सिर्फ दिल्ली के लोगों में नहीं है बल्कि भारत के चारों महानगरों जिसमें मुंबई, बेंगलूरू और कोलकाता भी शामिल हैं। इन शहरों में रहने वाले सबसे ज्यादा तनाव में रहते हैं। दिल्ली 142 अंक लेकर अव्वल है जबकि मुंबई 138 अंक के साथ दूसरे स्थान पर कोलकाता और बेंगलूरू 131 और 130 अंक के साथ तीसरे-चौथे स्थान पर हैं।
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अगर आप दिल्ली या देश के महानगरों में अपना भविष्य खोज रहे हैं तो बेहतर हैं कि आप चार बार सोंचे और अपने शहर और गांव में ही भविष्य ढूंढिए। क्राइम और पॉलूशन में अव्वल दिल्ली तनाव देने वाले शहरों में भी अव्वल है। बहरहाल, यह पहली बार नहीं है कि दिल्ली किसी निगेटिव कारणों से चर्चा में हो। पॉलूशन से लेकर क्राइम और रेप सिटी तक दिल्ली को ही कहा जाता रहा है।
इसी विश्व में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां तनाव न के बराबर है जिसमें जर्मनी के स्टटगार्ट, हनोवर,म्युनिख और हम्बर्ग के लोगों को सबसे कम तनावग्रस्त देशों की सूची में शामिल है जहां लोगों को उनकी सुविधा के अनुरूप काम करने की सुविधा और तनाव होने पर छुट्टी का भी प्रावधान दिया जाता है।