एम जगदीश कुमार ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथारिटी ऑफ इंडिया) और यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के सदस्य रहे हैं। प्रो. कुमार जेएनयू के कुलपति हैं। नैनो इलेक्ट्रानिक डिवाइसेस, नैनो स्केल डिवाइस माडलिंग एंड सिमुलेशन, पॉवर सेमीकंडक्टर डिवाइस के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ के तौर पर जाने जाते हैं।
इस क्षेत्र में उन्होंने 200 से अधिक शोध पत्र, तमाम लेख, करीब चार किताबें अदि लिखी हैं। इलेक्ट्रानिक डिवाइस के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रो. कुमार को करीब आधा दर्जन अवार्ड भी मिले हैं।
तेलंगाना राज्य के नलगोंडा जिले के मामीडाला गांव में पैदा हुए जगदीश कुमार के पिता प्राइमरी के शिक्षक थे, लेकिन प्रो. कुमार ने मेधा के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी ऊंचाई छू ली है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एमएससी और पीएचडी कर चुके प्रोफेसर मामीडाला जगदीश कुमार आईआईटी, दिल्ली में 1997 में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर आए थे। जनवरी 2005 में वह प्रोफेसर बने।
प्रो. कुमार एक नैनो इलेक्ट्रानिक डिवाइस के ज्ञानी होने के साथ-साथ प्रतिष्ठित पत्रिका साइंटिफिक रिपोटर्स के संपादक मंडल में हैं। इलेक्ट्रानिक डिवाइसेज सोसाइटी की पत्रिका जेईईई के 2006-2015 तक संपादक (अमेरिका के इलेक्ट्रिक एंड इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग इंट्सीट्यूट से प्रकाशित) रहे हैं।
इसके अलावा प्रो. कुमार ने अपनी क्षेत्र की तमाम अन्य पत्र-पत्रिकाओं में शोध प्रपत्र, संपादन, प्रधान संपादक की भूमिका निभाई है।
प्रो. एम जगदीश जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति बने। इसमें उनकी मेधा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन प्रशासनिक मामलों में वह कोई ख्याति नहीं अर्जित सके। अक्टूबर से जेएनयू के छात्र फीस वृद्धि को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
दो से अधिक बार एचआरडी मंत्रालय ने भी कुलपति से छात्रों से बात करने के लिए सुझाव दिया। निर्देश भी दिया। लेकिन सूत्र बताते हैं कुलपति के रवैये के कारण मामला पेचीदा होता चला गया।
यहां तक विश्वविद्यालय में हिंसात्मक हमले तक हुए और जिसके बाद से कुलपति की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में कुलपति का मानना है कि पूरे प्रकरण में केवल उनकी ही गलती नहीं है।