जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस में रविवार शाम को जमकर बवाल हुआ और मारपीट में छात्र संघ अध्यक्ष आइश घोष का सिर फट गया है। छात्र संघ का दावा है कि यह बवाल लेफ्ट और एबीवीपी के छात्रों के बीच हुआ है। इस हिंसा में दोनों छात्र संगठनों के करीब 25 छात्र घायल हुए हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष आइश घोष और शिक्षक सुचित्रा सेन को भी गंभीर चोटें आई हैं।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया उन्होंने कहा कि नकाबपोश ठगों द्वारा जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर क्रूर हमला किया गया है, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, यह चौंकाने वाला है।
हमारे राष्ट्र के नियंत्रण में फासीवादी, हमारे बहादुर छात्रों की आवाज से डरते हैं। जेएनयू में आज की हिंसा उसी डर का प्रतिबिंब है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है। केजरीवाल ने कहा कि मैं जेएनयू में हिंसा से काफी हैरान हूं। छात्रों पर बुरी तरह से हमला किया गया है। पुलिस को तुरंत हिंसा रोककर शांति कायम रखनी चाहिए। अगर कैंपस के भीतर भी छात्र सुरक्षित नहीं हैं, तो देश कैसे तरक्की करेगा।
सीपीआई—एम के महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सत्ता पक्ष पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जेएनयू से जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक एबीवीपी के गुंडों ने प्रशासन के साथ हिंसा की और उन्होंने छात्रों व शिक्षकों के साथ मारपीट भी की। यह सत्ता में रहने वाले लोगों द्वारा सुनियोजित हमला था।
उन्होंने कहा कि मास्क पहने लोग जेएनयू में दाखिल हुए जबकि कानून लागू करने वाले वहां खड़े थे। यह वीडियो दिखाता है कि आरएसएस और भाजपा भारत को बदलना चाहते हैं। मगर वे सफल नहीं होंगे।
कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं कि जेएनयू छात्रों पर मास्क पहने लोगों द्वारा किया गया हमला सरकार के इशारे पर हुआ है। कांग्रेस ने पूछा कि क्या मोदी सरकार छात्रों व युवाओं से बदला लेना चाहती है।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि जेएनयू में छात्रों के साथ मारपीट की गई। शिक्षकों को पीटा गया। गुंडे महिलाओं के हॉस्टल में भी घुस गए। कैंपस में बर्बरता का नजारा देखने को मिला। इस दौरान एक भी पुलिसवाला नहीं दिखा, न ही जेएनयू प्रशासन कहीं नजर आया। क्या मोदी सरकार छात्रों व युवाओं से बदला लेना चाहती है।
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि जेएनयू को लेकर मोदी सरकार का द्वेष जगजाहिर है। दिल्ली पुलिस जेएनयू के गेट पर थी। इसके बावजूद साबरमती व अन्य हॉस्टल में गुंडे लाठी और रॉड से छात्रों व शिक्षकों को पीटकर चले गए। क्या यह सरकार द्वारा प्रायोजित दंगे का रूप है?
चिदंबरम: टीवी पर जो दिख रहा है वो चौंकाने और डराने वाला
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस घटना को चौंकाने वाली बताया। उन्होंने ट्वीट किया कि टीवी पर जो लाइव दिख रहा है, वह बहुत चौंकाने और डराने वाला है। मास्क पहने लोग जेएनयू हॉस्टल में घुसते हैं और छात्रों पर हमला कर रहे हैं। पुलिस क्या कर रही थी? पुलिस कमिश्नर कहां हैं?' उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह का हमला सरकार की मदद के बिना नहीं हो सकता।
ममता बनर्जी ने की घटना की निंदा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जेएनयू में छात्रों व शिक्षकों पर हमले की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। इस तरह की घटना की निंदा करने के लिए हर शब्द कम है