आईएसआईएस जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में उपजे कन्हैया विवाद का फायदा उठाना चाह रहा था। आईएसआईएस की ओर से यह योजना बनाई गई थी कि छात्र प्रदर्शनों में शामिल होकर गाड़ियों में तोड़फोड़ की जाए और आगजनी भी कराई जाए। ये बातें आईएसआईएस से जुड़े संगठन जुनुद अल-खलीफा-ए-हिंद (जेकेएच) के लिए भर्ती करने वाले मोहम्मद अफजल,मोहम्मद अब्दुल अहद और आशिक अहमद उर्फ राजा ने अपने बयान में बताई हैं। इस संगठन के बारे में ऐसा माना जाता है कि यह आईएस का भारतीय मॉड्यूल है।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार 19 वर्षीय आशिक अहमद उर्फ राजा जो पश्चिम बंगाल के हुगली का रहने वाला है, उसे कन्हैया के जेल भेजे जाने के बाद हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो कर गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी करने को कहा गया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इन तीनों के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के अतंर्गत दर्ज किया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी आतंकी का बयान एजेंसी द्वारा रिकार्ड किया गया है। तीनों आतंकियों ने अपने बयान में माना है कि वे जेकेएच के गठन और पंजान, बेंगलुरु, पश्चिम बंगाल और तुमकुर की बैठकों में शामिल थे।
आशिक ने एनआईए को पूछताछ में यह भी बताया है कि उनसे नक्शा बनाना, छिपकर रहने और तैराकी सीखने के लिए भी कहा गया था। साथ ही साथ उन्हें इंडियन मुजाहिद्दीन के पूर्व सरगनाा यासीन भटकल को जेल से छुड़ाने का टारगेट भी दिया गया था।