केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, निसार केवल एक उपग्रह नहीं, यह भारत की विश्व के साथ वैज्ञानिक साझेदारी है। यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व बंधु दृष्टिकोण को साकार करता है, जिसमें भारत मानवता के सामूहिक कल्याण में योगदान देता है। इसरो और नासा के बीच पहला संयुक्त पृथ्वी अवलोकन मिशन होने के नाते, यह भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग और इसरो के अंतरराष्ट्रीय सहयोग में एक ऐतिहासिक क्षण है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के संयुक्त मिशन नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) को बुधवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया जाएगा। यह दुनिया का सबसे महंगा पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। यह उपग्रह प्राकृतिक संसाधनों और खतरों के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगा। 12,968 करोड़ रुपये (1.5 अरब डॉलर) की लागत वाला यह उपग्रह श्रीहरिकोटा के इसरो अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी मार्क-द्वितीय रॉकेट से शाम 5.40 बजे लॉन्च किया जाएगा।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को विश्व बंधु बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है-एक ऐसा वैश्विक साझेदार, जो मानवता की सामूहिक भलाई में योगदान दे।
उन्होंने कहा कि इसरो और नासा के बीच सहयोग वाले पहले संयुक्त पृथ्वी अवलोकन मिशन के रूप में यह प्रक्षेपण भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के साथ-साथ इसरो के समग्र अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक निर्णायक क्षण है।
सिंह ने कहा, एनआईएसएआर न केवल भारत और अमेरिका की सेवा करेगा, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए डेटा मुहैया कराएगा, विशेष रूप से आपदा प्रबंधन, कृषि और जलवायु निगरानी जैसे क्षेत्रों में।उन्होंने कहा कि मिशन की एक प्रमुख विशेषता यह है कि एनआईएसएआर में दर्ज होने वाला डेटा अवलोकन के एक से दो दिनों के भीतर स्वतंत्र रूप से सुलभ हो जाएगा, और आपात स्थिति में लगभग वास्तविक समय में उपलब्ध हो सकेगा।