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नागरिकता बिल का संसद में पारित होना जिन्ना के विचारों की होगी जीत : थरूर

Sun, 08 Dec 2019 09:30 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शशि थरूर - फोटो : ANI
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वरिष्ठ कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक का संसद में पारित होना पक्के तौर पर महात्मा गांधी के विचारों पर मोहम्मद अली जिन्ना के विचारों की जीत होगी। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकता देने से भारत ‘पाकिस्तान का हिंदुत्व संस्करण’ बनकर रह जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ‘एक समुदाय’ को बाहर निकालना चाह रही है और अन्य धर्मों की तरह इस समुदाय के लोगों की उन्हीं परिस्थितियों में उत्पीड़न के बावजूद शरण देने से इनकार कर रही है।

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 कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि बिल संसद के दोनों सदनों से पारित भी हो जाता है तो उन्हें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट की कोई भी पीठ देश के संविधान की मूल भावना का घोर उल्लंघन नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार का शर्मनाक कृत्य है जिसने पिछले साल राष्ट्रीय शरणार्थी नीति बनाने पर चर्चा करने से इनकार कर दिया था। इस नीति को उन्होंने निजी सदस्य बिल के तौर पर प्रस्तावित किया था और तत्कालीन गृह मंत्री, गृह राज्यमंत्री और गृह सचिव के साथ निजी तौर पर चर्चा भी की थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि अचानक उन्होंने शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए आगे बढ़कर काम किया है, जबकि हकीकत में वे मूलभूत कदम भी नहीं उठाना चाहते जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शरणार्थी दर्जा तय करने में सुधार या शरणार्थियों से अच्छा व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।उन्होंने कहा कि इन सबसे साफ होता है कि यह महज कुटिल सियासी चाल है ताकि देश में एक समुदाय को निशाना बनाया जा सके।
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गरिकता बिल पर कांग्रेस के रुख पर उन्होंने कहा कि वह पार्टी के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं लेकिन भरोसा है कि पार्टी में हम सबका मानना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक न केवल संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत प्राप्त समानता और धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं करने की मूल भावना के खिलाफ है बल्कि भारत की अवधारण पर भी हमला है।

उन्होंने देश का स्वतंत्रता संग्राम इस आधार पर बंट गया कि क्या धर्म के आधार राष्ट्रीयता तय की जाए और जिन लोगों का उस सिद्धांत में भरोसा था उन्होंने पाकिस्तान की अवधारणा की वकालत की। उन्होंने कहा कि भाजपा ने देश में राष्ट्र के संबंध में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के विचारों की जड़ को जमाने का मार्ग प्रशस्त किया है जहां धर्म राष्ट्रीयता में निहित है। ऐसा कर वह महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, मौलाना आजाद, बीआर आंबेडकर और उनके समय के स्वतंत्रता सेनानियों की भारत की उस अवधारणा को खंडित कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी।

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