सांसद सतीश कुमार गौतम ने कहा कि उन्हें एएमयू में जिन्ना की तस्वीर लगी होने की जानकारी मिली है। यह तस्वीर कहां और किस वजह से लगी है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में कुलपति को पत्र भेजकर उनसे जिन्ना की तस्वीर लगाने की वजह पूछी है। आखिर एएमयू की कौन सी मजबूरी है कि उसे जिन्ना की तस्वीर लगानी पड़ रही है। पूरी दुनिया जानती है कि जिन्ना भारत के बंटवारे के मुख्य सूत्रधार थे। मौजूदा हालात में पाकिस्तान रोजाना बेजा हरकतें करने से बाज नहीं आ रहा है। सांसद प्रवक्ता संदीप चाणक्य ने बताया कि कुलपति को पत्र भेजा जा चुका है।
उधर, एएमयू जनसंपर्क कार्यालय के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि दूसरी ओर द अली जिन्ना की तस्वीर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ भवन में लगी है। दरअसल, यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी, तब छात्रसंघ का गठन हो चुका था।
भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले वर्ष 1938 में मोहम्मद अली जिन्ना एएमयू में आए थे, उन्हें छात्रसंघ ने मानद सदस्यता दी थी। छात्रसंघ ने जिन लोगों को मानद सदस्यता दी है, उनकी तस्वीरें छात्रसंघ भवन में लगवाई गई हैं। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ एक स्वतंत्र संगठन है, इसलिए एएमयू इंतजामिया इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करता है।