गुजरात विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद जिग्रेश मेवानी अब दलित राजनीति को लेकर देश का चेहरा बनने में जुट गए हैं। पुणे के कोरेगांव मामले से महाराष्ट्र की राजनीति गर्माने के बाद मेवानी शुक्रवार को सीधे दिल्ली पहुंचे। कोरेगांव मामले में दर्ज प्रथमिकी की परवाह किए बिना उन्होंने यहां सीधे पीएम मोदी से दो-दो हाथ करने का ऐलान किया। मेवानी ने कहा कि वे 9 जनवरी को संसद मार्ग पर आयोजित हुंकार रैली को संबोधित करने के बाद पैदल चलकर पीएम आवास जाएंगे और वहां पीएम से मनु स्मृति या संविधान में से किसी एक को चुनने की बात करेंगे। उत्तर भारत में भाजपा के खिलाफ सियासी लड़ाई के लिए मेवानी ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर की रिहाई को मुद्दा बनाया है।
उत्तर भारत की राजनीति में एंट्री के दिए संकेत
पीएम मोदी पर सियासी हमले के साथ ही मेवानी ने दिल्ली से चंद्रशेखर की रिहाई की मांग कर अब देश के सबसे बड़े प्रदेश में यूपी की राजनीति में एंट्री के भी संकेत दे दिए हैं। पीएम के गृह राज्य में भाजपा का संकट बढ़ाने वाले मेवानी अब देश के सबसे बड़े प्रदेश में भी अपनी गतिविधि बढ़ाने के प्रयास में हैं जहां से मोदी सांसद हैं। उनके इस कदम को भाजपा और बसपा के लिए अहम माना जा रहा है। गुजरात के उना दलित कांड को उभारकर मेवानी दलित राजनीति का प्रभावी चेहरा बनकर उभरे हैं। हाल ही में तमाम चुनौतियों को पार करते हुए वे गुजरात की वीरमगांव विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर विधानसभा भी पहुंच चुके हैं। हालांकि कांग्रेस ने अपने वर्तमान विधायक से सीट खाली कराकर मेवानी के लिए यह सीट छोड़ी थी। कांग्रेस की मदद से गुजरात विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद मेवानी के हौसले बढ़े हुए हैं। महाराष्ट्र पहुंचकर उन्होंने भीमा-कारेगांव के मामले के जरिए सूबे की सियासत गर्मा दी है, तो अब कड़ाके की ठंढ़ में देश की राजधानी में आकर यहां के सियासी पारे को भी गर्म कर दिया है। दलित सियासत का नया सितारा बनकर उभरे जिग्रेश मेवानी केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ाने के लिए अब दिल्ली के मैदान में डट गए हैं।
पीएम के पास मनु स्मृति और संविधान लेकर जाएंगे जिग्रेश
मेवानी अब सीधे पीएम मोदी से अपनी राजनीति जोड़ रहे हैं ताकि सुर्खियां बटोर सकें। मेवानी ने कहा है कि वे 9 जनवरी को संसद मार्ग पर आयोजित हुंकार रैली को संबोधित करने के बाद पीएम से मिलने के लिए पैदल चलकर पीएम आवास जाएंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि पीएम मोदी से मुलाकात के वक्त वे एक हाथ में संविधान और दूसरे हाथ में मनु स्मूति रखेंगे और पीएम से आग्रह करेंगे कि वे संविधान और मनु स्मृति दोनों में से किसी एक का चयन करें।
9 जनवरी को है मेवानी की हुंकार रैली
मेवानी ने सामाजिक न्याय के नाम पर दिल्ली के संसद मार्ग पर 9 जनवरी को युवा हुंकार रैली का आयोजन रखा है। इस रैली के जरिए मेवानी की मुख्य मांग केंद्र सरकार से दो-दो हाथ करते हुए भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर को रिहा करने की रहेगी। उनकी इस कोशिश को राष्ट्रीय स्तर पर दलित राजनीति का चेहरा बनने की कवायद माना जा रहा है। उनकी वैचारिक लड़ाई वैसे तो सीधे भाजपा और उसकी सरकारों के खिलाफ है। मगर उनके सियासी कदमों से उत्तर भारत में सबसे ज्यादा नुकशान बसपा और उसकी मुखिया मायावती को होगा। भगवा परिवार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए मेवानी ने कहा है कि भाजपा को दलितों की हत्या बंद करनी चाहिए। मेवानी की ओर से हुंकार रैली के जरिए दलित और मुस्लिम गठजोड़ को पुख्ता करने के लिए अल्पसंख्यकों को भी रिझाने की कवायद की गई है। रैली के नारों में लिखा गया है कि युवाओं को रोजगार दो और अल्पसंख्यकों पर हमला नहीं चलेगा। इस युवा हुंकार रैली में मेवानी के साथ असम के नेता अखिल गोगोई भी शामिल रहेंगे।