झारखंड के एक छोटे से गांव में रहने वाला शख्स कथित तौर पर देश के सबसे बड़े धोखाधड़ी वाले रैकेट का सरगना है। उसके द्वारा ट्रेन किए गए लोग अब तक एक लाख से ज्यादा लोगों को बेवकूफ बनाकर उनके अकाउंट से पैसे निकाल चुके हैं। यह रैकेट लोगों से भारतीय रिजर्व बैंक के कस्टमर केयर कर्मचारी बनकर बात करता था। रैकेट के सरगना का नाम राम कुमार मंडल है।
35 साल का आरोपी दसवीं फेल है। उसने अब तक अपने गांव के 200 युवाओं को ट्रेन किया है जो बैंक अधिकारी बनकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और गोवा के लोगों से बात करते थे और उनके अकाउंट की सूचना हासिल करके पैसे निकालते थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी माओवादियों के एक समूह की मदद से पिछले चार सालों से इस रैकेट को चला रहा था।
पुलिस झारखंड के इस गांव में दिल्ली के आनंद विहार में धोखधड़ी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच करने के लिए पहुंची थी। एक महिला ने आनंद विहार में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसमें उसने बताया था कि
रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने उसे फोन करके आधार कार्ड को लिंक करने में मदद की। जैसे ही उसने कॉलर को ओटीपी बताया उसके अकाउंट से 1.9 लाख रुपए निकाल लिए गए। पीड़िता द्वारा ओटीपी बताने के बाद पैसों को एक ई-वॉलेट में ट्रांसफर किया गया था।
पुलिस ने बताया कि साल 2016 से मंडल इस रैकेट को चला रहा था। लोगों के अकाउंट से पैसे निकलाकर मंडल इसका इस्तेमाल कॉलर्स को तनख्वाह देने और ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदने में करता था। सामान को वह अपने एक रिश्तेदार के घर पर मंगवाता था जोकि किराए पर लिया हुआ था। पुलिस को पता चला है कि मंडल के पास 20 बैंक अकाउंट हैं जिसमें 3 लाख रुपए हैं। इन अकाउंट्स में वह ई-वॉलेट से पैसा ट्रांसफर किया करता था। कुछ पैसों को वह सोने और चांदी के आभूषण खरीदने में भी खर्च करता था।