होमगार्ड की नियुक्ति से संबंधित मामले में झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दो साल बाद भी फैसला नहीं सुनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदियों से संबंधित एक अन्य मामले में फैसला न सुनाने पर नाराजगी जताई थी। अब अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर उन दीवानी मामलों के संबंध में रिपोर्ट मांगी है, जिनमें अभी फैसला नहीं सुनाया गया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने होमगार्ड की नियुक्ति से संबंधित मामले में दो साल बाद भी फैसला नहीं सुनाया। फैसले में देरी पर तीन छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताई है।
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वरिष्ठ वकील निखिल गोयल ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को बताया कि हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पिछली बार 6 अप्रैल, 2023 को मामले की सुनवाई की थी। पीठ ने मौखिक रूप से कहा था कि वह इसे आदेश के लिए सुरक्षित रख रही है, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं सुनाया है। इस पर पीठ ने नाराजगी जताई।
पीठ की टिप्पणी- ऐसा लगता है रजिस्ट्रार जनरल ने 5 मई के आदेश को गलत समझा
गौरतलब है कि पीठ ने आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदियों से संबंधित एक अन्य मामले में भी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर एक रिपोर्ट का अवलोकन किया। इसमें दीवानी मामलों का विवरण न होने पर पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने एक अन्य मामले में पारित 5 मई के आदेश को गलत समझा, जिसमें ऐसे लंबित मामलों का विवरण मांगा गया था।
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अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर मांगी रिपोर्ट
शीर्ष अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर उन सभी दीवानी मामलों के संबंध में रिपोर्ट मांगी है, जिनमें दलीलें सुनी गई हैं और निर्णय नहीं सुनाए गए हैं। इन मामलों में याचिकाकर्ताओं और अन्य सह-याचिकाकर्ताओं द्वारा हाईकोर्ट में दायर रिट याचिकाएं भी शामिल हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई 23 मई तय की है।
ये है पूरा मामला
तीन छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि झारखंड सरकार ने 2017 में 1,000 से ज्यादा होमगार्ड की भर्ती निकाली थी, जिसमें उनके नाम मेरिट लिस्ट में थे। हालांकि, बाद में सरकार ने भर्ती रद्द कर दी। इसके खिलाफ उन्होंने 2021 में हाईकोर्ट में अपील की, जिस पर 6 अप्रैल 2023 को फैसला सुरक्षित रखा गया, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं आया।