प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को झारखंड की निलंबित आईएएस अधिकारी सिंघल मामले में बड़ा दावा किया। ईडी ने कहा कि पूजा सिंघल को खूंटी जिले के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कोष से कमीशन दिया गया। यह भुगतान अधीनस्थ कर्मचारियों की ओर से किया गया। ईडी ने कहा कि कमीशन का इस्तेमाल सिंघल और उनके पति ने विभिन्न संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया। जांच एजेंसी ने यह आरोप पीएमएलए कोर्ट के सामने उनके और पांच अन्य के खिलाफ दायर आरोप-पत्र में लगाए हैं। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की शिकायत पर मंगलवार को संज्ञान लिया।
सीए सुमन कुमार को किया था गिरफ्तार
इससे पहले सीए सुमन कुमार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया गया था। मामला मनरेगा के कोष में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। उस वक्त सिंघल खूंटी की उपायुक्त थीं। गिरफ्तार किया गया एक अन्य आरोपी पूर्व कनिष्ठ अभियंता राम बिनोद प्रसाद सिन्हा भी उस जिले में तैनात थे। ईडी ने कहा कि जांच में पाया गया कि राम बिनोद प्रसाद सिन्हा और अन्य इंजीनियरों द्वारा (आईएएस) पूजा सिंघल को धनराशि की मंजूरी के संबंध में कमीशन का भुगतान किया गया था।