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झारखंड चुनाव में इन 10 दलबदलुओं को मुंह की खानी पड़ी

Tue, 24 Dec 2019 09:03 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
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झारखंड चुनाव नतीजे
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झारखंड विधानसभा चुनाव में इस बार मतदाताओं ने कम से कम 10 दलबदलुओं को पटखनी दे दी। इन सभी ने अपने-अपने दल की तरफ से टिकट नहीं मिलने पर पाला बदलकर दूसरे का दामन थाम लिया था, लेकिन यह बदलाव मतदाताओं को रास नहीं आया। एनसीपी के टिकट पर नाला सीट से उतरे भाजपा के पूर्व प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर को तो महज 987 वोट ही मिल सके।

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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमाचू को आजसू के टिकट पर घाटशिला सीट से, एक अन्य पूर्व अध्यक्ष सुखदेव भगत को भाजपा के टिकट पर लोहरदगा सीट से और भाजपा के पूर्व चीफ व्हिप राधाकृष्ण किशोर को आजसू के टिकट पर छत्तरपुर सीट से हार मिली। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी आजसू के टिकट पर बोरियो सीट से हार गए।

भाजपा छोडक़र जेएमएम गए फूलचंद मंडल को सिंदरी सीट के, पूर्व बसपा विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता को आजसू के टिकट पर हुसैनाबाद सीट के मतदाताओं ने नकार दिया। भारागोड़ा सीट से पूर्व जेएमएम विधायक कुणाल सारंगी और बरही सीट से पूर्व कांग्रेसी विधायक मनोज यादव को भाजपा के टिकट पर उतरना रास नहीं आया। जेएमएम अध्यक्ष शिबू सोरेन के करीबी समझे जाने वाले अकील अंसारी ने आजसू का दामन थामा तो वे पाकुर सीट से हार गए।
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कुछ को मिला मतदाताओं का आशीर्वाद

दलबदलुओं में से कुछ को मतदाताओं ने अपना आशीर्वाद देकर विधानसभा का रास्ता दिखाया। इनमें जेएमएम के टिकट पर गांदे सीट से उतरे पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सरफराज अहमद, पूर्व मंत्री भानुप्रताप साही ने भवनाथपुर सीट और पूर्व जेएमएम विधायक जयप्रकाश पटेल ने मांडू सीट से भाजपा के टिकटों पर जीत हासिल की। एक अन्य पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम ने भाजपा छोडक़र जेएमएम के टिकट पर लातेहार सीट से विजयी सेहरा बांधा।

सीट घटीं, सत्ता छिनी पर भाजपा के समर्थक मतदाता बढ़े

झारखंड में भले ही भाजपा को विधानसभा चुनाव में जेएमएम, कांग्रेस और राजद की तिकड़ी के गठबंधन के हाथों सत्ता गंवानी पड़ी हो, लेकिन उसके चाहने वाले मतदाताओं की संख्या में इस बार भी 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ, सबसे ज्यादा सीट जीतकर सत्ता की चाबी अपने हाथ में करने वाली जेएमएम के समर्थक मतदाताओं में इस बार 2014 के मुकाबले 2 फीसदी की कमी आई है।

2014 में 37 सीट जीतने वाली भाजपा ने तब 31.26 फीसदी वोट हासिल किए थे, लेकिन इस बार पार्टी 33.37 फीसदी वोट पाकर भी 25 सीट पर ही सिमट गई। दूसरी तरफ, 2014 में 19 सीट वाली जेएमएम के 20 फीसदी से ज्यादा वोट थे, जबकि इस बार उसकी सीटें बढक़र 30 होने पर भी वोट प्रतिशत घटकर 18.72 हो गया। कांग्रेस को छोटे दलों के साथ का फायदा मिला और उसका वोट प्रतिशत 2014 के 10.46 फीसदी (9 सीट) से बढक़र 13.88 फीसदी (16 सीट) पर पहुंच गया।
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