मुख्यमंत्री रघुबर दास अपनी सरकार द्वारा संथाल परगना को विकास के लिए आवंटित धनराशि जो उनकी पूर्ववर्ती सरकारों से कहीं ज्यादा थी का हवाला देकर विकास के नाम पर वोट मांग रहे हैं। लेकिन बरहेट के अपने घर में अमर उजाला से बात करते हुए हेमंत सोरेन कहते हैं कि इस बार दुमका और बरहेट दोनों ही क्षेत्रों से उनकी जीत तय है, क्योंकि संथाल परगना अब अगली सरकार की कमान अपने हाथ में चाहता है।
पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन 2014 में भी दुमका और बरहेट से चुनाव लड़े थे, लेकिन दुमका से वह हार गए थे। इस बार भी दुमका में उनका मुकाबला भाजपा की लुईस फर्नांडीस से है जिन्होंने पिछली बार हेमंत को हराया था। लुईस रघुबर सरकार में मंत्री हैं और उनकी सबसे बडी ताकत है कि यहां शहर में भाजपा का ठोस जनाधार है।
जबकि हेमंत को ग्रामीण इलाकों में आदिवासियों के समर्थन का भरोसा है और साथ ही झामुमो को उम्मीद है कि सरयू राय की बगावत भी शहर में भाजपा के वोटों में झामुमो के पक्ष में सेंधमारी करके हेमंत की राह आसान करेगी। लेकिन भाजपा की उम्मीदें बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के उम्मीदवार पर टिकी हैं। भाजपा कार्यालय में बैठे महिपाल सिंह कहते हैं कि मरांडी जितने वोट आदिवासियों के काटेंगे, उतना ही फायदा भाजपा को होगा।
पूर्व मंत्री और भाजपा से अलग होकर हेमंत सोरेन के चुनाव प्रचार में जुटे सरयू राय कहते हैं कि अगर सौ किलोमीटर के दायरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ही उम्मीदवार के खिलाफ दो जनसभाएं करनी पड़ें तो इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि राज्य में भाजपा की हालत कितनी खस्ता हो चुकी है।
राय कहते हैं कि लोग बदलाव चाहते हैं और हेमंत सोरेन इस बार दोनों जगह से चुनाव जीतेंगे।लेकिन यह भी सही है कि दुमका शहर में जितने झंडे बैनर पोस्टर भाजपा के दिखते हैं उतने झामुमों के नहीं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में झामुमो कार्यकर्ता गले में हरा पटका जिस पर पार्टी का चुनाव चिन्ह तीर कमान बना है घूमते हुए खूब मिलते हैं।