पुराने समय में यह कहावत थी कि बेटिकट यात्री जहाजों के कोनों में छुप-छुपकर यात्रा करते थे, लेकिन एक प्रमुख विमान कंपनी के कमांडर न केवल दो बार कॉकपिट में बैठकर यात्रा की, बल्कि एक बार विमान भी उड़ाया और कमांडर ने इस बारे में कोई सबूत भी नहीं छोड़ा कि उसने विमान में सफर किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस आशय की खबर प्रकाशित की है।
इस घटना ने विमानन जगत के कान खड़े कर दिए हैं। नागरिक उड्डयन के डायरेक्टर जनरल ने जेट एयरवेज कंपनी के वरिष्ठ कमांडरों में से एक पर सवाल उठाया है। आरोप है कि पहली बार कमांडर ने दिल्ली-बेंगलुरु-दिल्ली फ्लाइट को बिना लाइसेंस के उड़ाया और फिर रिकॉर्ड्स को मिटा दिया कि उसने जहाज उड़ाया। बाद में इसी पायलट पर एक और आरोप लगा कि वह दिल्ली से बेंगलुरु फ्लाइट को उड़ाकर परीक्षा देने गया, ताकि अपने लाइसेंस को वैध रख सके। दिलचस्प है कि इस बार भी उसने कोई रिकॉर्ड्स कहीं भी नहीं छोड़ा।
नागर विमानन के एक वरिष्ठ अधिकरी ने कहा कि 'हम सुरक्षा को लेकर हुई एक गंभीर चूक की जांच कर रहे हैं। यह जांच का विषय है कि कैसे पायलट रिकॉर्ड में हेरफेर कर सकते है। हमारी प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि वह शख्स दोनों मामलों में कॉकपिट में था। इस मामले को नागरिक उड्डयन सुरक्षा और उचित कार्रवाई के लिए ब्यूरो भेजा जाएगा। '
जेट एयरवेज के एक प्रवक्ता ने कहा, 'मामले की जांच से पहले हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। जांच के लिए डीजीसीए को पूर्ण सहयोग कर रहे हैं।'
फिलहाल जेट एयरवेज विभाग एक 'भूत पायलट' के मामले की जांच में जुट गया है।