जेट एयरवेज की गिरती वित्तीय स्थिति को संभालने में नाकाम साबित हो रहे चेयरमैन नरेश गोयल ने बृहस्पतिवार को अपना पद छोड़ने पर सहमति जता दी है। गोयल ने ही 25 साल पहले जेट एयरवेज की शुरुआत की थी। उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय 14 फरवरी को कंपनी के बोर्ड और शेयरधारकों की तरफ से कर्जदाताओं के बेलआउट प्लान को दी गई मंजूरी के तहत लिया है, जिसमें कर्जदाताओं ने लगातार चार तिमाही से भारी घाटा झेल रही एयरलाइंस की अधिकतर हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति जताई थी।
सूत्रों के मुताबिक, नरेश गोयल ने इस्तीफा देने का फैसला बुधवार को कर्जदाताओं और सऊदी अरब की एतिहाद एयरवेज के सीईओ टॉनी डगलस के साथ हुई बैठक के बाद लिया। यह बैठक एतिहाद और कर्जदाताओं के बीच के मुद्दे सुलझाने के लिए बुलाई गई थी। एतिहाद एयरवेज के पास जेट एयरवेज में 24 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि कर्जदाताओं के समूह का नेतृत्व स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कर रहा है। हालांकि जब कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट मामलों व जनसंपर्क) रागिनी चोपड़ा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऐसी कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया।
भुगतान नहीं होने पर खड़े हुए 6 और जहाज
जेट एयरवेज ने बृहस्पतिवार को लीज रेंटल का भुगतान नहीं होने के कारण अपने 6 और विमान उड़ान भरने के बजाय खड़े हो जाने की जानकारी दी। वित्तीय संकट में बुरी तरह घिर चुकी एयरलाइंस की तरफ से यह जानकारी बृहस्पतिवार को स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल की गई एक फाइलिंग में दी गई। इससे पहले बुधवार को भी एयरलाइंस ने 7 विमानों के खड़े हो जाने की जानकारी दी थी। इस महीने एयरलाइंस के जमीन पर खड़े हो जाने वाले विमानों की कुल संख्या अब 19 पर पहुंच गई है।