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तलाक की कगार पर पहुंचा महागठबंधन! ये हैं पांच कारण

Sat, 15 Jul 2017 09:56 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
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बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक दल जेडीयू और राजद में तनातनी जारी है। दोनों ओर से पाला ‌खिंच चुका है, न राजद प्रमुख लालू यादव हार मानने को तैयार हैं न गठबंधन के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही झुकने को राजी हैं। तेजी से बदलते घटनाक्रम में परिस्थितियां भी इस ओर इशारा कर रही हैं कि यह राजनीतिक साझेदारी अब ज्यादा दिनों की मोहताज नहीं है।
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शनिवार को पटना में हुए एक सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुंचे जहां कुर्सी और नेमप्लेट तेजस्वी यादव की भी लगी थी, लेकिन वह नहीं आए। इससे नाराज नीतीश ने तुरंत दोनों चीजों को हटवा दिया। बताया जाता है कि इस घटनाक्रम से नीतीश इस कदर नाराज हुए कि अगले ही दिन यानि रविवार को दल के विधायकों की बैठक भी बुलवा ली।

बताया जा रहा है कि इस बैठक में नीतीश कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। ऐसे में हर किसी की निगाहें इसी बैठक पर टिकी है। हालांकि जानकारों की मानें तो दोनों पक्षों में जिस कदर तनातनी का आलम है उसके लक्षण इसी बात कही गवाही दे रहे हैं कि इस महागठबंधन की उम्र अब ज्यादा नहीं बची है। आइए डालते हैं ऐसे ही पांच लक्षणों पर एक निगाह।
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लालू ने झुकने की सभी संभावनओं को किया खारिज

लालू ने झुकने की सभी संभावनओं को किया खारिज
डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ अवैध संपत्ति के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद नीतीश कुमार उनसे इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं, उन्होंने इस मुद्दे पर सीधे तो कुछ नहीं किया लेकिन अपने इरादे खुलकर जाहिर कर दिए। लेकिन दिक्‍कत ये है कि नीतीश की इस मांग पर लालू ने झुकने से साफ इंकार कर दिया है। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में लालू ने साफ कर दिया कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे परिणाम चाहे जो हों, लालू इस कदर खफा हैं कि उन्होंने सोनिया से बातचीत की बात से भी मना कर दिया, कहा- मेरी कोई बात नहीं हुई और न करूंगा।

एक दूसरे से बात करने को भी तैयार नहीं नीतीश लालू
इस पूरे झगड़े के बीच मुख्य बात ये है कि लालू और नीतीश दोनों ने ही लंबे समय से एक दूसरे से बात नहीं की है, हालांकि मीडिया में शुरूआत में ये खबर आई थी कि झगड़ा निपटाने के लिए दोनों के बीच बातचीत हुई है लेकिन बाद में लालू और नीतीश दोनों ने इससे साफ इंकार कर दिया। यह बात मीडिया तक खास तौर पर पहुंचाई गई कि दोनों ने कोई बातचीत नहीं की है, जिससे बदलते समीकरणों का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

बैठक में न आकर तेजस्वी ने दिए बगावत के संदेश
शनिवार को पटना में एक कार्यक्रम के दौरान हुए घटनाक्रम ने भी महागठबंधन में दरार बढ़ने के साफ संकेत दिए। इस कार्यक्रम में जिस तरह उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अनुपस्थित रहकर अपनी नाराजगी का इजहार किया वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अखर गया। उन्होंने भी मंच पर रखी तेजस्वी के नाम की नेमप्लेट और कुर्सी को तुरंत हटवाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए। इसी कार्यक्रम के बाद नीतीश ने रविवार को जदयू विधायकों की बैठक बुला ली है।
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भ्रष्टाचार पर छवि से समझौते के मूड में नहीं हैं नीतीश कुमार
12 साल से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि राज्य के साथ ही देशभर में सुशासन बाबू और भ्रष्टाचार पर कोई रियायत न बरतने वाले नेता की रही है। पिछली सरकारों में वह अपने कई मंत्रियों को सिर्फ आरोप लगने के बाद हटा चुके हैं। लेकिन लालू यादव के साथ गठबंधन की सरकार में आने के बाद नीतीश की इस छवि को धक्का पहुंचा है।

भ्रष्टाचार सहित कानून व्यवस्‍था से जुड़े कई मामलों में चुप्पी साधने के कारण उनकी आलोचना भी हुई। लेकिन अब एक बार फिर वह अपनी छवि दुरुस्त करने की कवायद में जुट गए हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि बिहार की जनता सीएम के रूप में उनकी इसी छवि को पसंद करती है इसलिए वह इस बार किसी समझौते के मूड में नहीं हैं। यही कारण है कि लालू और उनकी पार्टी के लाख दबाव बनाने के बाद भी वह कोई नरमी बरतने को तैयार नहीं हैं।

बहुमत के समीकरण एकतरफा नीतीश के हक में
नीतीश के इस तल्‍ख मिजाजी के पीछे सत्ता का वह समीकरण भी है जो पहली नजर में उनके पक्ष में दिख रहा है। बिहार विधानसभा में नीतीश की पार्टी जेडीयू के पास कुल 71 सीटें हैं जबकि लालू की राजद के पास 80 और गठबंधन की तीसरी साझेदार कांग्रेस के पास 27 सीटें। ऐसे में अगर नीतीश गठबंधन से अलग होते हैं तो 53 सीटों वाली भाजपा उन्हें तुरंत समर्थन देने के लिए तैयार खड़ी है वो भी सरकार से बाहर रहकर। भाजपा से मिलकर बहुमत पूरा हो जाएगा।

वहीं, हालिया झगड़े में राजद विधायक भाई वीरेन्द्र ने यह कहकर और आग में घी डालने का काम किया है कि उनके पास 80 विधायक हैं, वो बड़ी पार्टी हैं और वही होगा जो वो चाहेंगे। इस पर जेडीयू की ओर से तुरंत तगड़ा पलटवार करते हुए कहा गया कि, पांच मिनट नहीं लगेंगे नीतीश को सत्ता छोड़ने में, लेकिन वह ईमानदारी से कोई समझौता नहीं करेंगे। राजद नेताओं के इसी बयान के बाद नीतीश के रुख में परिवर्तन आया है और उन्होंने जल्द कोई निर्णय लेने के संकेत दे दिए हैं। ऐसे में अब सारी निगाहें रविवार को होने वाली जेडीयू विधायकों की बैठक पर टिकी हैं।
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