अली अनवर के अनुसार नंदनगांव के हालात महाराष्ट्र के कोरेगांव और गुजरात के ऊना सरीखे हैं। अन्य भाजपाशासित राज्यों की तरह बिहार में भी दलितों पर अत्याचार हो रहा है। बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले पर हुई जानलेवा पत्थरबाजी की घटना को पूर्व जदयू नेता ने पुलिस की गलत कार्रवाई का नतीजा करार दिया है।
नंदनगांव में सीएम के आने से एक घंटे पहले पुलिस ने गांव के दलित लोगों पर लाठी बरसाते हुए उन्हें दूर खदेड़ दिया था, जिसकी वजह से दलितों में रोष था। वह रोष नीतीश के काफिले पर पथराव के रूप में प्रकट हुआ।
अली अनवर के अनुसार नंदनगांव के दलित और पिछड़े समाज के लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्ञापन देकर अपनी समस्याओं से अवगत कराना चाहते थे। कार्यक्रम से एक घंटे पहले उक्त समाज के लोगों ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी, तो उन्हें मना कर दिया गया। इस पर लोगों ने प्रशासन से अपनी मांग शांतिपूर्वक रखी, तभी उन्हें पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ा। पुलिस ने दलित और पिछड़े समाज के इन लोगों पर डंडे बरसाते हुए इन्हें आयोजन स्थल से दूर खदेड़ दिया।
पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों को गंभीर चोटें भी आई, जिसे लेकर पूरे समाज में रोष फैल गया। समाज ने अपनी बात रखने के लिए नीतीश की गाड़ी रोकनी चाही, मगर सीएम का काफिला जब नहीं रुका तब उन्होंने उस पर पथराव किया। इसके बाद से उन दलित और पिछड़े समाज के लोगों पर बिहार पुलिस की बर्बरता बदस्तूर जारी है। निर्दोष लोगों को जेल में डाल दिया गया है, तो पुलिस कार्रवाई की दहशत से लोग गांव छोड़ कर भागे हुए हैं। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए ही शरद यादव ने नंदनगांव जाने का निर्णय लिया है।