बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के साथ सहजता वाले बयान से जेडीयू के नेता केसी त्यागी पलट गए हैं। त्यागी ने कहा है कि उनके बयान को गलत तरीके से लिया गया। त्यागी बोले कि उन्होंने अटल बिहारी बाजपेयी के साथ रिश्तों की बात की थी।
त्यागी ने मंगलवार को कहा था कि वो सरकार चलाने में राष्ट्रीय जनता दल से ज्यादा भाजपा के साथ सहज थे। त्यागी ने ये भी कहा था कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी एकता को तोड़ने के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। कांग्रेस के अलावा अन्य सभी विपक्षी दल चाहते थे कि गोपाल कृष्ण गांधी को विपक्ष का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया जाए, लेकिन कांग्रेस इस बात के लिए राजी नहीं हुई।
केसी त्यागी ने तो साफ कह दिया कि जेडीयू बीजेपी के साथ गठबंधन में कहीं अधिक सहज थी, जबकि लालू यादव के साथ स्थिति बेहद असहज हो चली है। दरअसल, राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करने के समय जेडीयू के अलग रुख के बाद कांग्रेस और आरजेडी ने नीतीश कुमार की तीखी आलोचना की थी।
जेडीयू के जनरल सेक्रेटरी केसी त्यागी ने ये बात उस सवाल के जवाब में कही थी, जिसमें लालू-नीतीश के बीच बढ़ती खाईं और आरजेडी से गठबंधन पर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को बीजेपी के साथ सरकार चलाने में इतनी दिक्कतें कभी नहीं आई, जितनी लालू यादव के साथ सरकार चलाने में आ रही है। हम एनडीए में कहीं अधिक सहजता के साथ काम करते थे। केसी त्यागी ने साथ ही ये भी कहा कि हमारा गठबंधन सिर्फ बिहार तक है, जिसे हम और आप महागठबंंधन के नाम से जानते हैं। कांग्रेस के साथ ही भूमिका सिर्फ बिहार तक ही सीमित है।