बीते शनिवार को हुई विपक्षी गठबंधन इंडिया की वर्चुअल बैठक में बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपने प्रस्ताव से सभी को चौंका दिया। इस बैठक में उन्होंने खुद संयोजक बनने के बदले इसके लिए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का नाम सुझाया। इससे पहले उन्होंने गठबंधन के अध्यक्ष के लिए राहुल गांधी के नाम का प्रस्ताव रखा। वह भी तब जब गठबंधन के दूसरे दलों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को इस पद पर बैठाने के मामले में पहले सहमति बन चुकी है।
जदयू सूत्रों के मुताबिक नीतीश ने पहले ही खुद संयोजक नहीं बनने के फैसले से कांग्रेस समेत कुछ दूसरे दलों के नेताओं को अवगत करा दिया था। चूंकि गठबंधन का एक अध्यक्ष भी होगा, ऐसे में नीतीश गठबंधन में नंबर दो की भूमिका नहीं चाहते थे। इसके अलावा नीतीश का मानना है कि गठबंधन में शामिल दलों और नेताओं में राहुल गांधी की ही राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक पहचान है, इसलिए उन्होंने खरगे की जगह अध्यक्ष पद के लिए राहुल का नाम प्रस्तावित किया था।
इसलिए सुझाया लालू का नाम
लोकसभा चुनाव के बाद की संभावनाओं पर निगाहें
राहुल ने अध्यक्ष पद लेने से इन्कार कर खरगे का नाम आगे बढ़ाया
बैठक में जिस तरह नीतीश ने संयोजक बनने से इन्कार किया, उसी तरह राहुल गांधी ने भी अध्यक्ष बनने से इन्कार करते हुए एक बार फिर से इस पद के लिए खरगे का नाम आगे किया। राहुल ने इसके लिए अपनी भारत जोड़ो यात्रा और जमीनी स्तर पर काम करने का हवाला दिया। एनसीपी सूत्रों का कहना है कि इस महीने के अंत में गठबंधन के नेताओं की आमने सामने की बैठक से पहले संयोजक पद के लिए आम सहमति बनाई जाएगी और इसी बैठक में दोनों पदों की जिम्मेदारी तय करने की घोषणा की जाएगी।
सीट बंटवारा अब भी पहेली.