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Jayant Chaudhary: छोटे चौधरी जयंत ने लिया कड़ा फैसला, सभी प्रवक्ताओं की कर दी छुट्टी

Mon, 23 Dec 2024 06:08 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jayant Chaudhary: आरएलडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अंबेडकर मामले पर चल रहे ताजा विवाद के प्रकरण में पार्टी के एक प्रवक्ता ने टिप्पणी कर दी थी। यह बात एनडीए में रहते हुए नैतिक तौर पर गलत थी। 
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राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी - फोटो : ANI
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विस्तार
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राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने अपनी पार्टी के सभी राष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश के प्रवक्ताओं को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। पार्टी ने इसे मात्र एक सांगठनिक बदलाव बताया है, लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता ने एक चैनल पर भाजपा के एक शीर्ष नेता के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, इसके बाद जयंत चौधरी ने इसे पार्टी की अनुशासनहीनता माना और उन्होंने सभी प्रवक्ताओं को उनके पद से हटा दिया। 
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आरएलडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अंबेडकर मामले पर चल रहे ताजा विवाद के प्रकरण में पार्टी के एक प्रवक्ता ने टिप्पणी कर दी थी। यह बात एनडीए में रहते हुए नैतिक तौर पर गलत थी। ऐसे में छोटे चौधरी ने इसे अनुशासनहीनता के तौर पर लिया और प्रवक्ताओं को संवेदनशील विषयों पर कुछ कहते समय पर्याप्त संवेदनशीलता का परिचय देने का निर्देश दिया। लेकिन बाद में इस निर्णय पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्होंने सभी प्रवक्ताओं को हटाने का निर्णय ले लिया। 

पार्टी के एक नेता के अनुसार, जयंत चौधरी जल्द ही पार्टी में बड़ा बदलाव करेंगे। यह बदलाव 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को देखकर किया जाएगा। पार्टी अपने मतदाता वर्ग को ध्यान में रखते हुए नए पदाधिकारी घोषित करेगी। इसमें कुछ समय लग सकता है। नेता के अनुसार, पार्टी के नए पदाधिकारियों की जानकारी नए साल में ही होगी। 
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भाजपा के साथ आने का मिला लाभ
दरअसल, एक समय यूपी के बड़े दलों में शुमार राष्ट्रीय लोकदल कुछ समय पहले हाशिये पर चली गई थी। सपा-कांग्रेस के साथ रहते हुए आरएलडी ने वापसी की कोशिश की, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली। लेकिन मतदाताओं के रुख को भांपते हुए जयंत चौधरी ने पलटी मारी और वे एनडीए के खेमे में आ गए। एनडीए में आते ही आरएलडी एक बार फिर प्रासंगिक हो उठी है, वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मजबूत होने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आरएलडी भाजपा के साथ कोई तनाव नहीं चाहती। माना जा रहा है कि इसी रणनीति को ध्यान में रखते हुए जयंत चौधरी को कड़ा कदम उठाना पड़ा। 
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