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अम्मा का साथ दोगुना कर सकता है राजग की ताकत

Mon, 06 Jun 2016 06:30 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : PTI
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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए हालात कुछ मुफीद कर दिए हैं। मसलन असम में पहली बार भाजपा की सरकार बनने के बाद राजग की ताकत बढ़ी तो पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सत्ता में वापिस लौटने के बाद दोनों सरकारों ने केंद्र के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। 
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खासकर, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की राजग से बढ़ती नजदीकियों ने तो नई सियासी जुगलबंदी की राह तैयार कर दी है। जयललिता के साथ आने से भाजपा नीत राजग को दोहरा फायदा होगा। एक ओर जहां राज्यसभा में राजग की ताकत बढ़ेगी वहीं महत्वपूर्ण जीएसटी बिल पर भी सरकार को अपनी ‌हिचकोले खाती नैया पार लगने की उम्‍मीद है। 

तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों में जीत के बाद एआईडीएमके सुप्रीमो जयललिता के रुख में काफी लचीलापन देखने को मिल रहा है। पूर्व में केंद्र की सरकारों से दूरी बनाकर रखने वाली जयललिता इस बार भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के प्रति काफी नरम रुख अपनाए हुए हैं। चुनावों में जीत दर्ज करते ही उन्होंने यह कहकर इस बात के संकेत दिए थे कि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर जनता की भलाई के लिए काम करेंगी। 
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अम्मा को भी भा रही केंद्र सरकार से नजदीकियां

अपने प्रशंसकों में अम्मा के रूप में विख्यात जयललिता के इस बदलते रुख की वजह ये भी है कि चुनावों में किए गए भारी भरकम वादों के लिए उन्हें केंद्र सरकार की मदद की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में वह हर हाल में केंद्र सरकार से बनाकर रखना चाहती हैं, इसी कड़ी में माना जा रहा है कि जल्द ही वह दिल्‍ली आकर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर सकती हैं। 

लोकसभा में जयललिता के कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा 37 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं। 49 सांसदों के साथ वो सबसे बड़ी क्षेत्रीय ताकत हैं, ऐसे में वो एनडीए के पाले में जाती हैं तो उनका साथ केंद्र में भाजपा और राजग की ताकत को और बढ़ा सकता है। 

एआईडीएमके के राजग के साथ आने की संभावना इसलिए भी अधिक है क्योंकि तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और डीएमके साथ मिलकर लड़े थे। ऐसे में फिलहाल कांग्रेस उनके लिए अछूत ही है। लेफ्ट और तीसरा मोर्चा अभी इस हैसियत में ही नहीं है कि कोई उसके साथ लगने की गलती करेगा। वहीं जयललिता का साथ भाजपा के लिए काफी राहत भरा होगा। 49‌ सांसदों का साथ पाकर राजग विपक्षी दलों के हमलों को संसद और उसके बाहर आसानी से ध्वस्त कर सकता है।
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