पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए हालात कुछ मुफीद कर दिए हैं। मसलन असम में पहली बार भाजपा की सरकार बनने के बाद राजग की ताकत बढ़ी तो पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सत्ता में वापिस लौटने के बाद दोनों सरकारों ने केंद्र के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
खासकर, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की राजग से बढ़ती नजदीकियों ने तो नई सियासी जुगलबंदी की राह तैयार कर दी है। जयललिता के साथ आने से भाजपा नीत राजग को दोहरा फायदा होगा। एक ओर जहां राज्यसभा में राजग की ताकत बढ़ेगी वहीं महत्वपूर्ण जीएसटी बिल पर भी सरकार को अपनी हिचकोले खाती नैया पार लगने की उम्मीद है।
तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों में जीत के बाद एआईडीएमके सुप्रीमो जयललिता के रुख में काफी लचीलापन देखने को मिल रहा है। पूर्व में केंद्र की सरकारों से दूरी बनाकर रखने वाली जयललिता इस बार भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के प्रति काफी नरम रुख अपनाए हुए हैं। चुनावों में जीत दर्ज करते ही उन्होंने यह कहकर इस बात के संकेत दिए थे कि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर जनता की भलाई के लिए काम करेंगी।