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Bday Spcl: अपने हर फैसले में बेबाक रहीं जयललिता, उनसे जुड़े 11 किस्से

Fri, 24 Feb 2017 01:18 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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जयललिता बेशक फिल्मी पर्दे और सियासत की बुलंदियों पर पहुंचीं। उन्हें जनता ने इतना सम्मान दिया कि उन्हें मां शब्द यानी 'अम्मा' से संबोधित किया। लेकिन उनके साथ एक ऐसा वाकया भी घटा जिसे वह कभी नहीं भूल पाईं। उस वाकये के दौरान उन्हें खुद की तुलना 'महाभारत की द्रौपदी' से करनी पड़ी। जयललिता जब सूबे में नेता प्रतिपक्ष थीं तब एक बार विधानसभा में उनके साथ इंसानियत शर्मसार करने वाली घटना घटी। उनके साथ डीएमके विधायकों ने छेड़खानी की और उनके कपड़े फाड़ दिए। वे फटी हुई साड़ी में मीडिया के सामने आईं और खुद के साथ हुई वारदात की तुलना महाभारत की द्रौपदी के चीरहरण से की। इसके बाद उन्हें जनता की खूब सहानुभूति मिली थी।
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राजनीति में आने से पहले जयललिता दक्षिण की फिल्मों की स्‍थापित अभिनेत्री थीं। उनकी मां तमिल सिनेमा की लोकल ड्रामा कंपनियों में काम करती थीं। जयललिता भी अपनी मां के नक्शेकदम पर चलीं। उन्होंने फिल्मी करियर की शुरुआत बाल अभिनेत्री के तौर पर की। 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार मुख्य अभिनेत्री के तौर पर कन्नड़ फिल्म चिनाडा गोम्बे में काम किया। यह फिल्म हिट रही थी।

जयललिता के फिल्मी करियर का सबसे सुनहरा दौर 1965 से 1980 के बीच रहा। इस दौरान वे सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाली अदाकाराओं में से एक बन गई थीं। उन्होंने सैकडों तमिल और तेलुगू फिल्मों में काम किया। 

उन्होंने एकमात्र हिंदी फिल्म 'इज्जत' में काम किया। इसमें फिल्म में उनके साथ हीरो बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र थे। यह फिल्म 1968 में आई थी। साल 1965 से 1972 के दौरान उन्होंने ज्यादातर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ की। 

जयललिता का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने कभी शादी नहीं की, लेकिन अपने दत्तक पुत्र सुधारकरन की शादी में पानी की तरह पैसा बहाया। जिसको लेकर उनकी खूब आलोचना हुई।  

फिल्मों में उनके गुरु एमजी रामचंद्रन ही उन्हें राजनीति में लेकर आए। 1984 से 1989 के दौरान वे तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद भी रहीं। राज्यसभा से सांसद बनाए जाने के पीछे मुख्य वजह उनकी अंग्रेजी में वाकपटुता थी।

रामचंद्रन की मौत के बाद जयललिता ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली। हालांकि इसके लिए उन्हें रामचंद्रन की पत्नी के विरोध का भी सामना करना पड़ा। साल 1991 में जयललिता पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। वो सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वाली महिला थीं। 

मीडिया रिपोर्टों पर यकीन करें तो जयललिता ऐसी मुख्यमंत्री रहीं जिन्होंने महज एक रुपये की सैलरी पर काम किया। राजनीति में जयललिता की पहचान अपने कड़े और बेबाक निर्णयों के कारण रही। चाहे वो 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से एक झटके में समर्थन वापस लेना हो या आधी रात को डीएमके के प्रमुख करुणानिधि को उनके घर से घसीटकर जेल भिजवाना हो। 

दोबारा सत्ता में आने के बाद उन्होंने लॉटरी टिकट पर पाबंदी लगा दी थी। उन्होंने दो लाख हड़ताली कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया था। यही नहीं, उन्होंने किसानों की मुफ्त बिजली पर रोक लगाई, राशन की दुकानों पर मिलने वाले चावल के दाम बढ़ाए। जयललिता ने 5000 रुपये से ज्यादा आय वाले लोगों के राशन कार्ड खारिज करवा दिए थे। 

1992 में उनकी सरकार ने सूबे में लड़कियों सुरक्षा के लिए 'क्रैडल बेबी स्कीम' शुरू की। इस स्कीम का मकसद अनाथ और बेसहारा लड़कियों को खुशहाल जीवन देना था। जयललिता ने राज्य में ऐसे पुलिस थाने खुलवाए, जहां केवल महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होती थी।
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हालांकि 2011 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं जयललिता ने अपनी छवि और व्यवहार में बदलाव करने का प्रयास किया। अपने इस कार्यकाल में उन्होंने जनता के हितों से जुड़ी बहुत सी योजनाएं चलाईं। जिनमें सबसे प्रमुख अम्मा कैंटीन रही, जिसमें लोगों को मुफ्त के भाव भोजन मिलता था। अपनी इन्हीं योजनाओं के बूते जयललिता 2016 में एक बार फिर सत्ता में वापसी करने में सफल रहीं। महीनों तक लंबी बीमारी से जूझने के बाद वे 5 दिसंबर 2016 को चिर निंद्रा में लीन हो गईं।
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