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मंत्री के सामने मौलाना ने गो हत्या पर लोगों को उकसाया, जावेद अख्तर बोले- तुरंत गिरफ्तार किया जाए

Wed, 20 Jun 2018 07:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गीतकार और शायर जावेद अख्तर ने कर्नाटक में बकरीद पर गाय की कुर्बानी देने की कथित टिप्पणी करने वाले मौलाना तनवीर पीरा हाशिम की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। 

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अख्तर ने ट्वीट किया, ‘‘धर्मनिरपेक्षता का मतलब अल्पसंख्यकों की सांप्रदायिकता को नजरअंदाज करना या सहन करना नहीं है। इस गैर जिम्मेदार और अपमानजनक मौलाना तनवीर हाशिम को बेंगलुरु में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश के लिए तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। ’’

हाशिम ने यह टिप्पणी कुछ दिन पहले उत्तर कर्नाटक के विजयपुरा में रमजान के दौरान एक नमाज के बाद राज्य के मंत्री शिवानंद पाटिल की मौजूदगी में की थी। उनकी टिप्पणी से विवाद पैदा हो गया था, क्योंकि कर्नाटक में गौ हत्या पर प्रतिबंध है। 
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वहीं मौलाना ने कहा कि 'मेरे बयान को गलत तरह से पेश किया गया। मैं सूफीवाद का पालन करता हूं जिसमें किसी पेड़ की शाखा को काटने की इजाजत नहीं है, ऐसे में मैं किसी को मारने की बात कैसे कह सकता हूं। बीजापुर के हिंदू-मुस्लिम शांति से रह रहे हैं लेकिन कुछ असमाजिक तत्व हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।'

हाशिम विजयपुरा में हाशिम पीर दरगाह के प्रमुख हैं। हाशिम की विवादित टिप्पणी के बाद मंत्री ने चुप रहना ही बेहतर समझा।  हाशिम ने उर्दू में दिए अपने भाषण में कहा, ‘‘‘मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि दो महीने में बकरीद आने वाली है। गाय के नाम पर यह शैतान शरारत करेगा। मैं आपको (मंत्री को) पहले ही बता रहा हूं ताकि गाय के साथ कोई और कुर्बानी ना हो।’’

हाशिम की टिप्पणी की निंदा करते हुए भाजपा प्रवक्ता एस प्रकाश ने पीटीआई भाषा से कहा कि अख्तर ने प्रतिगामी टिप्पणी की। जद (एस)- कांग्रेस की गठबंधन सरकार को नींद से जागना चाहिए और मौलाना के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करना चाहिए। 

उन्होंने आरोप लगाया कि मौलानाओं और अल्पसंख्यक लोगों की सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर सरकार का पक्षपाती रवैया है। प्रकाश ने जद (एस)- कांग्रेस सरकार के ‘ दोहरे मापदंड ’ पर सवाल उठाया और पूछा कि पार्टी विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री बसवराज पाटिल यतनाल और हाशिम के लिए अलग अलग मापदंड क्यों होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सरकार यतनाल के खिलाफ मामला दर्ज कर सकती है तो मौलाना के खिलाफ क्यों नहीं ?
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