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जाट आरक्षण पर रोक लगाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

Wed, 01 Jun 2016 10:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,नई दिल्ली
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जाट आरक्षण पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा दायर की गई है।
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समिति के नेता हवा सिंह सांगवान के माध्यम से दाखिल इस याचिका में हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को दरकिनार करने की गुहार लगाई गई है जिसमें सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थान में जाट सहित छह समुदाय को मिलने वाले आरक्षण पर रोक लगाई गई थी। गत 26 मई को मुरारी लाल गुप्ता द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश पारित किया था।

याचिका में कहा गया है कि याचिका लंबित होने के दौरान सरकार द्वारा पास किए कानून पर रोक नहीं लगाई जा सकती। बिना सभी पक्षों को सुने हुए हाईकोर्ट का ऐसा आदेश पारित नहीं करना चाहिए। आरक्षण पर अंतरिम रोक लगाने का मतलब जनहित याचिका को स्वीकार करने वाली बात है।
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गत 29 मार्च को राज्य विधानसभा ने विधेयक पारित कर जाट, जाट सिख, मुस्लिम जाट, विश्नोई सहित छह समुदायों को शिक्षण संस्थानों में होने वाले दाखिले व क्लास-तीन और चार वर्ग की नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय लिया था। वहीं क्लास- एक और दो में इन समुदायों को छह फीसदी आरक्षण दिया गया था।

याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के इस आदेश से जाट समेत छह समुदायों के छात्रों व नौकरी की तलाश कर रहे लोग बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। हाल ही हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से 41735 पदों के लिए भर्तियां निकाली गई हैं।

इन भर्तियों के लिए भारी संख्या में पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया है। साथ ही शिक्षण संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, बीटेक आदि प्रोफेशनल कोर्स के लिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक, इन कोर्स में दाखिले के लिए पिछड़े वर्ग के 21729 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि 2010 के हाईकोर्ट रूल्स के तहत हाईकोर्ट को इस जनहित याचिका पर विचार ही नहीं करना चाहिए था। हाईकोर्ट रूल्स के तहत जनहित याचिका के जरिए किसी कानून की वैधता को चुनौती नहीं दी जा सकती। इसके अलावा जनहित याचिका दायर करने वाला प्रभावित पक्ष भी नहीं है।
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