जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती व अन्य के खिलाफ जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत गुरुवार को मामला दर्ज कर किया गया। इस कानून के अनुसार, सार्वजनिक सुरक्षा के मद्देनजर किसी भी व्यक्ति को दो साल तक बिना मुकदमा गिरफ्तार किया जा सकता है। या फिर उसकी नजरबंदी की जा सकती है।
कश्मीर के नेताओं के लिए सिरदर्द बन रहा यह कानून फारूक अब्दुल्ला के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने बनाया था। इस कानून को लकड़ी के तस्करों से निपटने के लिए लागू किया गया था।
इसलिए पड़ी जरूरत:
जन सुरक्षा कानून 1970 के दशक में जम्मू-कश्मीर में लकड़ी की तस्करी एक बड़ी समस्या बनती जा रही थी। कड़ा कानून नहीं होने की वजह से अपराधी आसानी से छूट जाते थे। इसके समाधान के लिए शेख अब्दुल्ला इस कानून को लेकर आए।
90 के दशक में सुरक्षा बलों के काम आया
कश्मीर में 1990 के दौरान उग्रवाद चरम पर पहुंच गया था। इसे रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए यह कानून एक अहम हथियार बना। इसी दौरान तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने प्रदेश में विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को लागू किया। इसके बाद पीएसए के तहत कई लोगों को पकड़ने का भी काम किया गया।