किसी की परीक्षा थी तो कोई अपनी पढ़ाई में व्यस्त था, लेकिन जब दिल्ली-एनसीआर के विश्वविद्यालयों और कालेजों में पढ़ने वाले जम्मू-कश्मीर के छात्रों से कहा गया कि खेल मंत्री विजय गोयल उनसे मिलना चाहते हैं तो सौ से भी अधिक छात्र मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खेल मंत्री से रूबरू होने आ गए।
मौका था जम्मू कश्मीर के छात्रों और खेल मंत्री के बीच बृहस्पतिवार को रखा गया संवाद कार्यक्रम का। विजय गोयल ने उनमें ऊर्जा भरने की कोशिश की, उनकी पसंद के गाने गवाए, बावजूद इसके अंत में इन छात्रों का दर्द छलक पड़ा।
कश्मीर से यहां पढ़ने आए छात्र सैफ ने उनके जैसे कश्मीरी छात्रों के साथ हो रही बदसलूकी के मुद्दे को उठाया। उसने कहा जब वह घर जाते हैं तो उनसेे घर वाले कहते हैं कि यहां क्या रखा है। यहां तो बस अशांति है।
पढ़ाई-लिखाई करने के लिए बाहर जाओ और यहां जब पढ़ने के लिए आते हैं तो उनसे दुर्व्यवहार करते हुए वापस जाने को कहा जाता है। जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय की कश्मीरी छात्रा हुमाइरा ने उसके और उसके साथियों के साथ दिल्ली की अलकनंदा मार्केट में पुलिस की ओर से शक्की अंदाज में पूछताछ का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में उसके साथ दिक्कत नहीं है, लेकिन बाहर निकलते ही उनसे पुलिस फोटो दिखाने को कहती है और पूछताछ करती है। मेवाड़ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एक कश्मीरी छात्रा ने कहा कि कश्मीरी छात्र होने के नाते उन्हें कालेज की ओर से पीएम स्कॉलरशिप देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक उन्हें स्कॉलरशिप नहीं दी गई है, बल्कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।
जामिया की ही एक कश्मीरी छात्रा ने कहा कि उनसे कहा गया था कि खेल मंत्री से मिलकर उन्हें फायदा होगा। उसकी शुक्रवार को परीक्षा है। बावजूद इसके वह आई, लेकिन यहां आकर कोई फायदा नहीं हुआ। हालांकि खेल मंत्री ने कश्मीरी छात्रों को किसी भी तरह की दिक्कत होने पर उनकी मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने स्कॉलरशिप पर भी बात करने को कहा।
वहीं, वाईएमसीए फरीदाबाद में पढ़ने वाले जम्मू के छात्र आशीष सप्रू, कोयल और अंश ने अलग दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि कश्मीरी छात्रों की आड़ में जम्मू के छात्रों की हमेशा उपेक्षा होती है। उन्हें वह सुविधाएं कभी नहीं मिलतीं जो कश्मीरी छात्रों को मिलती हैं। अंश ने तो खेल मंत्री से जम्मू में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने की भी मांग की।