जांच एजेंसियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार की नमाज के बाद एकाएक स्थानीय युवकों के मोबाइल पर एक संदेश आता है। उसके तुरंत बाद वे भारतीय सुरक्षा बलों पर पत्थराव शुरू कर देते हैं।इन पत्थरबाजों को जो भी आर्थिक या दूसरी तरह की मदद मिलती है, वह आतंकियों के गुर्गों द्वारा मुहैया कराई जाती है। इसके लिए अलगाववादी और हुर्रियत संगठनों का नाम सामने आया है।
जांच एजेंसियों ने इन संगठनों के ठिकानों पर छापेमारी कर जो दस्तावेज हासिल किए हैं, उनसे स्पष्ट हो जाता है कि भारत में आतंक फैलाने के खेल में आईएसआई के अलावा पाकिस्तानी दूतावास भी शामिल है। जांच एजेंसियों को शक न हो, इसके लिए पाकिस्तान और दुबई से आने वाला रुपया-पैसा पाकिस्तानी दूतावास के जरिए कश्मीर में पहुंचाया जाता है। भारत में आतंकी फंडिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के चलते प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले दिनों आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के सात आतंकियों से जुड़ी 13 संपत्तियों को कुर्क कर लिया था। ये सारी संपत्ति जम्मू-कश्मीर में स्थित हैं, जिनमें मोहम्मद सफी शाह की संपत्ति भी शामिल है।
सफी शाह उर्फ डॉक्टर ही इस आतंकी फंडिंग का मास्टरमाइंड रहा है। वह पाक और दुबई से आने वाला पैसा आतंकियों को पहुंचाने में मदद करता था। उसकी खुद की संपत्ति भी इस फंडिंग की वजह से बढ़ती जा रही थी। ईडी ने अपने बयान में बताया कि जांच में पता चला है कि 'टेरर फंडिंग' को भारत में हवाला और दूसरे चैनलों के जरिए भेजा जाता है। शाह कथित टेरर फंडिंग के एक मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।