अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा येरूशलम नीति में बदलाव के बाद कश्मीर और एशिया के साथ दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। वहीं इस्त्राइल की सीमा पर हिंसक आंदोलन की भी शुरुआत हो गई है। फलस्तीनियों के अधिकारों के लिए लंबे समय से हिंसक संघर्ष करने वाले इस्लामी अतिवादी संगठन हमास ने शुक्रवार को ‘आक्रोश दिवस’ मनाने के साथ इस्त्राइल के खिलाफ नए सिरे से संघर्ष छेड़ने की अपील भी की।
आक्रोश दिवस मनाते हुए हजारों फलस्तीनी प्रदर्शनकारी शुक्रवार को फलस्तीन के कब्जे वाले वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी येरूशलम में सड़कों पर उतर गए। उन्होंने अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पथराव भी किया। अमेरिका के इस फैसले का मुस्लिम देशों ने कड़ा विरोध किया है।
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बृहस्पतिवार को फलस्तीनी आंदोलनकारियों ने दोपहर की नमाज के बाद ‘येरूशलम’ को अपना बताते हुए नारेबाजी और पत्थरबाजी की। इसके बाद इस्त्राइली सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई में आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर बुलेट से फायरिंग की। इस हिंसक झड़प में 31 फलस्तीनी घायल हो गए।
वहीं इस्त्राइल की सेना ने आरोप लगाया है कि गाजा पट्टी से एक विमान और एक टैंक को निशाना बनाकर तीन रॉकेट दागे गए। इस हमलों की जिम्मेदारी जिहादी सलाफी समूह अल-तवाहीद ब्रिगेड ने ली है। नारेबाजी और पत्थरबाजी की घटना के लगातार जारी रहने के कारण इस्त्राइल ने दोनों ही इलाकों में सेना की तैनाती को बढ़ा दिया है।
वहीं पड़ोसी देश जॉर्डन में भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। जबकि हमास ने नए फलस्तीन के लिए 1987-93 और 2000-05 के ‘इंतिफादा’ की तरह बड़े पैमाने पर विद्रोह छेड़ने की धमकी दी है। इन दोनों ही ‘इंतिफादा’ में फलस्तीन और इस्त्राइल दोनों ही तरफ के हजारों लोग मारे गए थे। वहीं इंडोनेशिया और मलेशिया के हजारों मुस्लिम समर्थकों ने हाथ में झंडे लेकर प्रदर्शन किया। टर्की की राजधानी इंस्तांबुल में भी हजारों फलस्तीनी समर्थकों ने प्रदर्शन किया।