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घाटी में आतंकियों से बड़ा खतरा बने ‘कीपैड जिहादी’, पुलिस ने शुरू किया शिकंजा कसना

Mon, 28 May 2018 11:06 AM IST
एजेंसी, श्रीनगर
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जम्मू-कश्मीर में बंदूक के साथ आतंक फैलाने वालों से भी ज्यादा बड़ी परेशानी पुलिस के लिए ‘कीपैड जिहादी’ बन गए हैं। ये वो लोग हैं, जो सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर आपसी वैमनस्य फैलाते हैं और इंटरनेट पर अफवाहे फैलाकर या किसी भी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर कानून-व्यवस्था की स्थिति को मिनटों में खराब कर देते हैं। अब पुलिस ने ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने के काम को अपना नया लक्ष्य बनाया है।

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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने ऐसे लोगों की पहचान शुरू करते हुए पांच ट्विटर हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। साथ ही गुमराह करने वाली पोस्ट पर जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करने के लिए फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल नेटवर्किंग सर्विस प्रदाताओं के पास भी शिकायत दर्ज की गई है। 

अधिकारी ने बताया कि इन ट्विटर हैंडल का ब्योरा जल्द कठोर कार्रवाई के लिए माइक्रो ब्लागिंग साइट को भेजा गया है, जिससे इन ‘कीपैड जिहादियों’ पर नियंत्रण करने में मदद मिल पाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इन पर नियंत्रण के लिए सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों और मैसेजिंग सर्विसों की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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इनसे निपटें तो असली आतंकी दबोचेंगे
दरअसल ‘कीपैड जिहादियों’ पर शिकंजा कसने की कार्रवाई इसलिए की जा रही है, जिससे पुलिस इंटरनेट पर कीपैड के जरिए राज्य के खिलाफ लड़ाई छेड़ रहे लोगों की बजाय असली बंदूकों के साथ आतंक फैलाने वाले आतंकियों को रोकने और खत्म करने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सके।

2016 के बाद बढ़े हैं ऐसे जिहादी

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2016 के बाद कश्मीर घाटी और जम्मू के कुछ हिस्सों में गलत जानकारी फैलाने के अभियान ने जोर पकड़ा है। पुलिस अधिकारी के अनुसार, हर दल भी अपने राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी भी घटना को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने में जुट रहे हैं, जिससे राज्य में सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी है और राज्य एक ऐसी लड़ाई का मैदान बन गया है, जहां परंपरागत हथियारों के बजाय नई उम्र के जिहादी कंप्यूटर व स्मार्टफोन के जरिए घाटी या उसके बाहर से दुनिया में कहीं भी बैठकर सरकारी मशीनरी को उलझा दे रहे हैं। 

बंद कराए गए हैं सैकड़ों संदिग्ध पेज व ग्रुप
पुलिस अधिकारी ने बताया, हमने सैकड़ों फेसबुक पेज व ट्विटर हैंडल को ब्लॉक कराने की शिकायतें कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम-इंडिया (सीईआरीटी-इन) को भेजी है। साथ ही मोबाइल सर्विस प्रदाताओं की मदद से व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसी मैसेजिंग सर्विस पर फूट डालने वाले मैसेज फैलाने वाले सिमकार्ड की सेवाएं बंद कराई गई हैं।

 

फोटोशॉप से बदली पिक्चर बढ़ा रही परेशानी

पुलिस अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों के लिए फोटोशॉप के जरिए किसी भी घटना की तस्वीर में फेरबदल कर या किसी आदमी की तस्वीर में फेरबदल कर झूठी सूचनाएं फैला दिया जाना बड़ी परेशानी बन रहा है। 

उन्होंने गेंदरबल की एक घटना का उदाहरण भी दिया, जिसमें एक दुकानदार के प्रतिद्वंद्वी दुकानदार ने उसकी तस्वीर को फोटोशॉप के जरिए आतंकी भेष में एके-47 के साथ दिखाकर उसके आतंकी बन जाने की अफवाह फैला दी, जबकि जांच में वो अपनी दुकान पर घरेलू सामान बेचता मिला। 

पुलिस अधिकारी का कहना है कि घाटी में सोशल साइटों व मैसेजिंग सर्विस के एक्सेस पर नियंत्रण से ऐसे लोगों पर शिकंजा कुछ हद तक कसा गया है, लेकिन जम्मू या राष्ट्रीय राजधानी या देश व दुनिया के अन्य हिस्सों में बैठकर ऐसा काम कर रहे लोगों पर नियंत्रण आसान नहीं हो पा रहा है।
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अमरनाथ यात्रा को लेकर है चिंता

सुरक्षा एजेंसियों की तत्काल चिंता अगले महीने के आखिरी सप्ताह से शुरू हो रही दो माह लंबी अमरनाथ यात्रा को लेकर है। एजेंसियों को डर है कि कोई भी आदमी अपने घर में बैठकर हजारों चैटिंग ग्रुपों में कोई भी झूठी खबर भेजकर पूरे राजय को सांप्रदायिक हिंसा में उलझा सकता है। 

पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऐसा पहले भी हो चुका है, जब एक खास समुदाय ने धार्मिक स्थलों के अपमान की झूठी फोटो फैला दी और अचानक उपद्रव शुरू हो गया, जबकि असलियत में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। ऐसे ही घाटी में फायरिंग में आम जनता के मारे जाने की झूठी खबर फैलाकर कश्मीर के अन्य हिस्सों में अशांति फैलाने की कोशिश भी सामने आ चुकी है।
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