पुलवामा में हुई आतंकी वारदात के बाद पूरे देश में कश्मीरी लोग, विशेषकर छात्रों से अभद्र व्यवहार किये जाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। हरियाणा के अंबाला में मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी के एक छात्र के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की थी। उसके एक अन्य साथी को कालेज छोड़ने के लिए कहा जा रहा था। हिंसक वारदात के बाद कालेज से लगभग 75 कश्मीरी छात्रों ने को यूनिवर्सिटी छोड़ दिया। देहरादून में लगभग तीन हजार कश्मीरी छात्र पढ़ाई करते हैं।
पुलवामा घटना के बाद कई जगह उनके साथ हिंसक घटनाएं हुईं। नोएडा में भी कश्मीरी छात्रों को प्रताड़ित करने की कुछ घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक लगातार पहल कर रहे हैं। कुछ महीने पहले अलीगढ़ में कश्मीरी छात्रों से विवाद का मामला सामने आया था, तब राज्यपाल मलिक ने खुद पहल करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति से बात की। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालय में कश्मीरी छात्रों के साथ होने वाली बद्सलूकी रोकने के लिए लायजन अफसर नियुक्त किए जाने की पहल की।
मिली जानकारी के मुताबिक राज्यपाल मलिक ने जिस जगह भी पचास से अधिक कश्मीरी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, ऐसे 11 विश्वविद्यालयों में भी लायजन अफसर नियुक्त करने का आदेश दिया था। बताते हैं पुलवामा हमले के बाद इन लायजन अफसरों ने काफी सक्रियता दिखाई और कश्मीरी छात्रों के साथ किसी अप्रिय घटना को रोकने में काफी मदद मिली है।
राज्यपाल ने सांप्रदायिक सौहार्द में संभाला मोर्चा
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पुलवामा हमले के बाद कुछ शरारती तत्व राज्य में सांप्रदायिक माहौल खराब करना चाहते थे, लेकिन समय रहते इस पर कार्रवाई की गई, जिसके कारण राज्य का माहौल खराब होने से बच गया। राज्य प्रशासन की सतर्कता और सुरक्षा एजेंसियों की मिलीजुली कार्रवाई के कारण राज्य के समाज को तोडऩे की कोशिश करने वाली ताकतों को कोई सफलता नहीं मिल पाई।