मुख्य न्यायाधीश अली मोहम्मद माग्रे की अध्यक्षता वाली जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की चार सदस्यीय किशोर न्याय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जब शीर्ष न्यायालय के 23 सितंबर के आदेश को उसके संज्ञान में लाया गया है तो संबंधित जांच एजेंसियों से तथ्यों की पुष्टि के लिए तुरंत इस संबंध में बैठक आयोजित की गई।
समिति ने पुलिस एवं अन्य जांच एजेंसियों की तरफ से दी गई सूचना का हवाला देते हुए उन मामलों की विस्तृत जानकारी दी जिनके तहत इन किशोरों को हिरासत में लिया गया था।
जम्मू कश्मीर के डीडीपी की ओर से समिति को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, ‘यह कहना उचित होगा कि किसी भी बच्चे को पुलिस प्रशासन ने अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया है क्योंकि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाता है। इसलिए याचिका में जिन कथनों का उल्लेख किया गया है वे गलत तरीके से पेश किए गए हैं और ये सुनवाई योग्य नहीं हैं।’
समिति ने अपनी रिपोर्ट में शीर्ष न्यायालय को बताया कि राज्य में दो किशोर निरीक्षण गृह स्थापित किए गए हैं, एक श्रीनगर के हरवान में और दूसरा जम्मू के आर एस पुरा में। इसके अनुसार पांच अगस्त के बाद से हरवान के किशोर निरीक्षण गृह में 36 किशोरों को भेजा गया जिनमें से 21 को जमानत दे दी गई जबकि 15 के संबंध में जांच जारी है।
इसके अनुसार पांच अगस्त के बाद से 23 सितंबर तक आर एस पुरा किशोर निरीक्षण गृह भेजे गए 10 किशोरों में से छह को जमानत दे दी गई है जबकि शेष चार के खिलाफ जांच जारी है।