मुस्लिम संगठन जमात उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक को असंवैधानिक बताने वाले फैसले को मानने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह फैसला इस्लामी शरीयत के खिलाफ है। संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को हलाला और कई शादी जैसे मुद्दों पर अलग सुनावई करनी चाहिए। इस मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार नहीं किया जा सकता।
जमात उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि हम धार्मिक मुद्दों पर कोई भी समझौता नहीं कर सकते हैं। संविधान में धर्म को लेकर जो भी अधिकार दिए हैं, हम उनसे समझौता किसी भी हालत में नहीं करेंगे। जमात उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ यह बयान दिया है। लोग सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मील का पत्थर मान रहे हैं, लेकिन कई मुस्लिम संगठन कोर्ट के इस फैसले को मानने को तैयार नहीं है।
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गौरतलब है कि तीन तलाक की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को फैसला सुनाते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने फैसला पढ़ते हुए सरकार को कानून बनाने की सलाह दी, जबकि अन्य तीन जजों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए 6 महीने के लिए रोक लगा दी।