जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटीमें एक स्मार्टफोन-सक्षम पीओसी प्रोटो-टाइप विकसित किया गया है। इससे तकनीकी विशेषज्ञ की सहायता के बिना ही एक घंटे के भीतर कोरोना होने या नहीं होने का पता लगाया जा सकता है।
जामिया मिलिया इस्लामिया के मल्टी डिसिप्लिनरी सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड स्टडीज (एमसीआरएएस) के अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिलकर कोविड-19 का पता लगाने के लिए यह आरएनए इक्स्ट्रैक्शन फ्री सलाइवा आधारित किट की खोज की है। इस तकनीक का नाम एमआई-एसईएचएटी (मोबाइल इंटीग्रेटेड सेंसिटिव एस्टीमेशन एंड हाई स्पसेफिसिटी एप्लिकेशन टेस्टिंग) है।
इसका उपयोग कोविड-19 का पता लगाने में प्वाइन्ट ऑफ केयर (पीओसी) डिवाइस के रूप में घर-घर परीक्षण के लिए किया जा सकता है।
इसे लेकर जामिया की कुलपति प्रो. नजमा अख्तर ने कहा, “यह तकनीक वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई में एक गेम-चेंजर हो सकती है। एमआई-एसईएचएटी सही मायनों में स्मार्ट इनोवेशन का एक बेहतरीन उदाहरण है और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची भावना का प्रतीक है। एक अनुकूल तकनीक होने के नाते, एमआई-सीएचएटी होम टेस्टिंग को प्रोत्साहित करेगा। कोविड-19 रोगियों की पहचान कर, इस रोग के प्रसार को सीमित करने में बहुत अहम भूमिका निभाएगा।
डॉ. जावेद इकबाल, रामालिंगस्वामी फेलो (डीबीटी), डॉ. तनवीर अहमद, असिस्टेंट प्रोफेसर (यूजीसी-एफआरपी) और डॉ. मोहन सी जोशी, सहायक प्रोफेसर (यूजीसी-एफआरपी डीबीए, वेलकम ट्रस्ट इंडिया अलायंस फेलो), ने वीएमएमसी (सफदरजंग अस्पताल) के डॉ. रोहित कुमार और वेलेरियन केम लिमिटेड के सीईओ डॉ. गगनदीप झिंगन के साथ मिलकर यह बड़ी खोज की है।
डॉ. जावेद इकबाल आजमगढ़ जिले के नौहरा गांव के हैं। डॉ. इकबाल ने पी.एच.डी. ए.एम.यू, अलीगढ़ से और संयुक्त राज्य अमेरिका से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वह 2017 में एमसीएआरसी (MCARS), जामिया मिलिया इस्लामिया में शामिल हो गए।
डॉ. इकबाल ने कहा कि यह तरीका सस्ता भी है क्योंकि किसी को सिर्फ लार इकट्ठा करना है, केमिकल मिलाना है और फिर इसे 10 मिनट तक उबालना है। उसके बाद, आप Cas13 एंजाइम के माध्यम से परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. इकबाल ने कहा कि यह तकनीक हमारे देश में कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) के निदान के लिए बहुत उपयोगी और त्वरित है।
एमसीएआरएस के निदेशक प्रो एम जुल्फिकार ने कहा, “एमआई-सीएचएटी से भारत के ग्रामीण इलाकों में तेजी से स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य-विशेषज्ञों की सेवाओं का विस्तार होगा। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकतर गांवों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अभी काफी अभाव है।