सांड व बैलों को काबू में करने वाली तमिलनाडु की एक पारंपरिक प्रतियोगिता जल्लीकट्टू के दौरान 100 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। पुलिस के अनुसार 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सभी अलग-अलग अस्पतालों में इलाजरत हैं।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट जल्लीकट्टू पर कानूनी तौर पर प्रतिबंध लगा चुका है। इसके बावजूद हर साल जनवरी में पोंगल के समय यह प्रतियोगिता आयोजित होती आ रही है। इस बाद तमिलनाडु राज्य सरकार सांडों के नाम पर टोकन जारी करने समेत विभिन्न दिशा निर्देश जारी किया है।
बताया जा रहा है कि कुल 500 सांडो पर काबू करने के लिए करीब 750 लोगों ने हिस्सा लिया था। मदुरै के अलंगानल्लूूर में गुरुवार को सांडों की पूजा के साथ प्रतियोगिता शुरू हुई थी। यहां के डीएम नटराजन और पुलिस अधिकारी डेविडसन ने बताया कि प्रतियोगिता शांतिपूर्ण आयोजित हो रही। सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था रही। पुलिस के अनुसार, करीब 20 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
क्या है जल्लीकट्टू प्रतियोगिता
जल्लीकट्टू तमिलनाडु में पोंगल के समय होने वाली एक पारंपरिक प्रतियोगिता है। इसमें बैलों व सांडों को पहले गुस्सा दिलाया जाता है, फिर उनको काबू में करने का प्रयास किया जाता है। बड़ी संख्या में प्रतिभागी पुरुष एक-एक कर बैल के सामने आते हैं और मैदान में बैलों से भिड़ते हैं। इसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी घायल होते हैं और कई बार तो जानें भी गंवानी पड़ती है।
पशुओं के अधिकारों पर काम करनेवाले संगठनों के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट इस पर कानूनी तौर पर प्रतिबंध लगा चुका है। इसके बावजूद यह खेल जारी है। बताया जाता है कि इस प्रतियोगिता को देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी तमिलनाडु पहुंचते हैं।