Jalgaon train accident: रेलवे अधिकारियों की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 13 नहीं बल्कि 12 लोगों की मौत हुई है। एक सिर और एक सिर विहीन शव को दो अलग-अलग मृतक मान लिया गया था। जिसके चलते ये चूक हुई।
महाराष्ट्र के जलगांव में बुधवार शाम को हुए रेल हादसे और 12 लोगों की मौत मामले की पांच वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों की एक टीम ने जांच शुरू कर दी है। इससे पहले 13 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया था। लेकिन अब रेलवे अधिकारियों की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 13 नहीं बल्कि 12 लोगों की मौत हुई है। एक सिर और एक सिर विहीन शव को दो अलग-अलग मृतक मान लिया गया था। जिसके चलते ये चूक हुई।
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मध्य रेलवे सीपीआरओ डॉ स्वप्निल नीला ने बताया कि, जलगांव रेल दुर्घटना में अज्ञात शवों के डीएनए जांच के बाद मृतकों की संख्या 12 हो गई है। एक सिर और एक सिर विहीन शव को दो अलग-अलग मृतक माना लिया गया था, लेकिन डीएनए जांच से पुष्टि हुई है कि सिर और धड़ एक ही व्यक्ति के हैं। इसलिए मृतकों की संख्या 12 हो गई है। 12 शवों में से 10 की पहचान हो गई है और मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि दे दी गई है। उनके शवों को एंबुलेंस के जरिए परिवारों द्वारा सुझाए गए वांछित स्थान पर भेज दिया गया है।
जलगांव रेल हादसे के मृतकों में सात नेपाली
- फोटो : PTI
7 नेपाली लोगों की मौत
हासदे में मारे गए 12 लोगों में से सात नेपाल के हैं। लच्छीराम खतरू पासी उन सात लोगों में से एक थे। उनके परिवार को न केवल उनकी मौत का दुख झेलना पड़ा, बल्कि उन्हें क्षत-विक्षत शव से उनकी पहचान करने की अत्यंत दर्दनाक प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ा। चार नेपाली पीड़ितों की पहचान मुंबई के कोलाबा की निवासी कमला नवीन भंडारी (43), ठाणे के भिवंडी में रहने वालीं जवाकला भाटे (60), लच्छीराम खतरू पासी (40) और इम्तियाज अली (11) के रूप में हुई थी। अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची में यह जानकारी दी गई है।
जलगांव रेल हादसे की पांच वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने जांच शुरू की: रेलवे बोर्ड
जलगांव मामले की पांच वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों की एक टीम ने जांच शुरू कर दी है। बोर्ड ने बताया कि टीम में प्रधान मुख्य सुरक्षा अधिकारी (पीसीएसओ), प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त (पीसीएससी), प्रधान मुख्य विद्युत इंजीनियर (पीसीईई), प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (पीसीएमई) और प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक (पीसीसीएम) शामिल हैं और ये सभी अधिकारी मध्य रेलवे जोन से हैं।
रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि टीम ने घटना की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि पीसीएसओ को संयोजक नियुक्त किया गया है।टीम को घटना के कारणों की जांच करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) स्वप्निल धनराज नीला ने बताया, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने बुधवार को हुए इस हादसे की प्राथमिक जांच शुरू की थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यात्रियों ने चेन क्यों खींची और पुष्पक एक्सप्रेस से क्यों उतरे।उन्होंने बताया कि अब जांच पांच वरिष्ठ अधिकारियों की टीम को सौंप दी गई है।
पुष्पक रुकने के 20 मिनट बाद पहुंची थी कर्नाटक एक्सप्रेस
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि जलगांव में आग की अफवाह के बाद पुष्पक एक्सप्रेस के चेन खींचकर रोके जाने के करीब 20 मिनट बाद कर्नाटक एक्सप्रेस वहां पहुंची थी। ऐसे में पुष्पक एक्सप्रेस से नीचे उतरे लोगों के पास सुरक्षित जगह पर जाने के लिए पर्याप्त समय था लेकिन लोग पटरी पर ही बने रहे। एक अधिकारी ने कहा, हमें 12 यात्रियों की मौत का बेहद दुख है लेकिन तथ्य यह है कि पुष्पक एक्सप्रेस को महेजी और परधाडे के बीच 4:45 बजे रोका गया जबकि कर्नाटक एक्सप्रेस वहां 5:05 बजे पहुंची। घटना के बाद यात्रियों की ओर से बनाए गए कई वीडियो भी इसकी पुष्टि करते हैं। यदि यात्रियों ने पटरी से दूर रहने के सामान्य सुरक्षा नियम का पालन किया होता तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। गौरतलब है कि पुष्पक एक्सप्रेस के कई यात्रियों ने दावा किया है कि आग की अफवाह के बाद उनके पटरी पर उतरने के तत्काल बाद ही कर्नाटक एक्सप्रेस आ गई थी जिससे लोगों को बचने का मौका नहीं मिला।