जल शक्ति मंत्रालय ने केंद्रीय भूजल बोर्ड में ग्रुप 'ए' वैज्ञानिकों की भर्ती और पदोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव करने का मसौदा जारी किया है। नए मसौदे में एक तय पदोन्नति प्रक्रिया, जरूरी कार्य अनुभव, कई स्तरों पर प्रदर्शन का मूल्यांकन और नई प्रशिक्षण जरूरतें शामिल की गई हैं। ये मसौदा नियम ग्रुप 'बी' से लेकर ग्रुप 'जी' वैज्ञानिक तक के पदों पर लागू होंगे। इन नियमों को जनता की राय के लिए जारी किया गया है और 13 जुलाई तक सभी हितधारक अपने सुझाव भेज सकेंगे।
यह मसौदा अधिसूचना 2024 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से शुरू की गई 'संशोधित सहज पदोन्नति योजना' (रिवाइज्ड फ्लेक्जिबल कंप्लीमेंटिंग स्कीम) के अनुसार बनाई गई है। अब वैज्ञानिकों को पदोन्नति पाने से पहले एक तय समय तक काम करना जरूरी होगा। जैसे ग्रुप सी वैज्ञानिक को कम से कम तीन साल काम करना होगा। ग्रुप ‘एफ’ और ‘जी’ को पदोन्नति से पहले पांच साल तक काम करना होगा। इसके साथ ही, ग्रुप ‘एफ’ वैज्ञानिक को दो साल और ग्रुप ‘जी’ को क्षेत्र (फील्ड) में पांच साल का कार्य अनुभव होना अनिवार्य है।
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इस संशोधित प्रणाली में बात दो-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली है। वैज्ञानिकों का पहले एक आंतरिक स्क्रीनिंग समिति द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा और फिर मूल्यांकन बोर्ड या विभागीय समीक्षा समिति द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह मूल्यांकन प्रक्रिया साल में दो बार (जनवरी और जुलाई में) आयोजित की जाएगी। जो वैज्ञानिक पास नहीं हो पाएंगे, वे एक साल बाद दोबारा मूल्यांकन के लिए पात्र होंगे, लेकिन उन्हें एक अतिरिक्त वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट भी देनी होगी। प्रशिक्षण भी इन नए नियमों का अहम हिस्सा है।
सीधी भर्ती वाले वैज्ञानिकों को लेना होगा प्रारंभिक प्रशिक्षण
सीधे भर्ती किए गए वैज्ञानिकों को एक साल का अनिवार्य प्रारंभिक स्तर का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (इंडक्शन लेवल ट्रेनिंग कोर्स) पूरा करना होगा। वहीं, जिन अधिकारियों की अंदर से पदोन्नति हुई है, उन्हें प्रबंधन और नेतृत्व से जुड़े दो सप्ताह के प्रशिक्षण को पूरा करना होगा। यह प्रशिक्षण राजीव गांधी नेशनल ग्राउंड वॉटर ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट या इंस्टीट्यूट ऑफ सेक्रेटेरियट ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट जैसे सरकारी संस्थानों में दिया जाएगा।
केवल तीन बार पदोन्नति के लिए प्रयास कर सकता है वैज्ञानिक
मसौदे में यह भी कहा गया है कि संशोधित सहज पदोन्नति योजना के तहत कोई भी वैज्ञानिक केवल तीन बार पदोन्नति के लिए प्रयास कर सकता है। अगर वह तीनों बार विफल रहता है, तो उसे एमएपीसी (Modified Assured Career Progression) योजना के तहत समायोजित किया जाएगा, जो बाकी केंद्रीय कर्मचारियों पर भी लागू होती है। कोई भी पदोन्नति पीछे की तारीख से नहीं दी जाएगी। अगर कोई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर है या छुट्टी पर है, तो उसे पदोन्नति उसी समय मिलेगी, जब वह वापस ड्यूटी पर आएगा।
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तय की गई वैज्ञानिक पदों की भी संख्या
प्रस्तावित दिशानिर्देशों में वैज्ञानिक पदों की कुल संख्या भी तय की गई है। इसमें हाइड्रोजियोलॉजी में 294 पद, जियोफिजिक्स में 31, केमिस्ट्री में 32, हाइड्रोलॉजी में 8 और हाइड्रोमेटियरोलॉजी में 9 पद होंगे। हालांकि, यह संख्या कार्यभार के अनुसार बदली जा सकती है। सेवानिवृत्ति, इस्तीफा या मृत्यु के कारण खाली हुए पद आमतौर पर प्रवेश स्तर पर भरे जाएंगे। लेकिन हाइड्रोलॉजी में खाली पद ग्रुप सी वैज्ञानिकों से भरे जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा भी स्पष्ट रूप से तय की गई है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए छूट की व्यवस्था भी है। इन पदों पर सीधी भर्ती यूपीएससी द्वारा आयोजित संयुक्त जियो-साइंटिस्ट परीक्षा के माध्यम से की जाएगी। सभी नियुक्तियां भारत या विदेश में सेवा और स्थानांतरण के लिए बाध्य होंगी।