वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए मंत्रियों और अफसरों को सोशल मीडिया पर खुलकर अपने विचार रखने की वकालत की है। माईगव के दो साल पूरा होने के कार्यक्रम के मौके पर जेटली ने यह बात कही।
कार्मिक विभाग (डीओपीटी) ने हाल ही में सेवा नियमों का मसौदा जारी किया है, जिसमें अफसरों को फेसबुक और ट्वीटर जैसी वेबसाइटों पर स्वतंत्र होकर भागीदारी करने का प्रस्ताव है। हालांकि सरकार की आलोचना पर अब भी रोक है। नियम मसौदे में अफसरों को टीवी, सोशल मीडिया या किसी अन्य संचार के साधन पर ‘सरकार की आलोचना’ करने पर रोक लगाई है।
जेटली ने कहा, ‘सरकार के अंतिम निर्णय आने के बाद सरकार को एक स्वर में बोलना चाहिए और निर्णय भी एक ही होना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन सोशल मीडिया में आपको एक ऐसा मजबूत विकल्प मिलता है जिसमें आप कोई निर्णय होने से पहले अलग-अलग राय दे सकते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘इसलिए मैं सरकार की पारदर्शी प्रणाली में मंत्रियों, अफसरों के स्वतंत्र होकर राय जाहिर करने को गलत नहीं समझता।’ जेटली ने कहा कि सोशल मीडिया पर अब महानगरों में ही नहीं बल्कि छोटे शहरों के स्कूल, कॉलेज के बच्चे इस पर खुलकर अपनी राय रखते हैं।