राज्यसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बीच आधार की अनिवार्यता पर तीखी नोकझोंक हो गई। जेटली ने चर्चा के जवाब में टैक्स रिटर्न भरने में आधार के इस्तेमाल को अनिवार्य करने के सरकार के फैसले को जायज ठहराया।
वहीं विपक्ष ने लोगों की निजता और डाटा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा किया। चिदंबरम ने क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के आधार के ब्योरे लीक होने की घटना का उदाहरण देते हुए सरकार की आधार नीति को खतरनाक करार दिया।
जवाब के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसदों ने विरोध में सदन से वॉकआउट कर लिया। दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि गैर लाभकारी कार्यों में आधार के इस्तेमाल से सरकार को नहीं रोका जा सकता। बहस के दौरान चिदंबरम ने कहा कि आधार मूल रूप से पहचान और सुविधाओं के लिए बनाया गया था। टैक्स और बैंक एकाउंट से जोडने की नीयत कभी नहीं थी। लेकिन इसका दायरा बढ़ाकर आम लोगों की निजता और उसकी डाटा सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है।
इसके जवाब में जेटली ने टैक्स रिटर्न को आधार से जोड़ने को तर्कसंगत बताते हुए कहा कि जिसके पास आधार नहीं है वह दूसरी पहचान देकर आधार के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन उसे रिटर्न के रिकार्ड में आवेदन का नंबर भरना होगा। जेटली ने कहा कि यह टैक्स की चोरी रोकने में काफी मदद करेगा। जेटली ने दलील दी कि डाटा हैक होने की संभावना मात्र से आधार का इस्तेमाल रोकना तर्कसंगत नहीं।