विदेश मंत्री डॉ.एस जयशंकर ने वडोदरा में 60 विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ लक्ष्मी विलास पैलेस का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज गर्व की बात है कि विदेश के 50 से ज्यादा राजदूतों के साथ हम यहां आए हैं। आज वे वड़ोदरा में समय बिताएंगे। कल वे केवड़िया जाएंगे। शाम को वे सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी जाएंगे। उनमें काफी उत्साह है, वे गुजरात की उन्नति देखना चाहते हैं। मुझे उम्मीद है कि उनके मन में गुजरात के बारे में एक अच्छी छवि बनेगी।
इस दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि 24 फरवरी को लड़ाई (रुस और यूक्रेन के बीच) शुरू हुई। उस समय हमारे करीब 20 हजार विद्यार्थी वहां पर फंसे हुए थे...जब से लड़ाई शुरू हुई प्रधानमंत्री की नजर इस पर थी। संघर्ष के दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की दोनों को कुछ समय के लिए संघर्ष विराम के लिए कहा, ताकि हम अपने छात्रों को सुरक्षित रूप से निकाल सकें।
उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण पेट्रोल की कीमतें दोगुनी हो गईं। हम पर तेल खरीदने का दबाव था, लेकिन पीएम मोदी और सरकार का विचार था कि हमें वही करना है, जो हमारे देश के लिए सबसे अच्छा है और अगर दबाव आता है, तो हमें इसका सामना करना चाहिए।
वडोदरा में विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में पूर्वोत्तर भारत में आतंकवादी घटनाएं कम हुई हैं, क्योंकि हमने 2015 में बांग्लादेश के साथ एक भूमि सीमा समझौता किया। इसने चरमपंथियों को बांग्लादेश में शरण लेने से रोक दिया, जिससे पूर्वोत्तर भारत में उनका अभियान बंद हो गया।
इस दौरान जयशंकर ने पाकिस्तान पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि हम एक पड़ोसी हैं, जैसे हम आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) में विशेषज्ञ हैं और वे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों में विशेषज्ञ हैं। यह वर्षों से चल रहा है, लेकिन हम दुनिया को समझा सकते हैं कि आतंकवाद आतंकवाद है। आज यह हमारे खिलाफ हो रहा है, कल यह आपके खिलाफ होगा। अब आतंकवाद के बारे में दुनिया की समझ पहले के समय की तुलना में बढ़ गई है। दुनिया इसे बर्दाश्त नहीं कर रही है। आतंकवाद का उपयोग करने वाले देश दबाव में हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि वैक्सीन का जो कच्चा माल होता है वो हर देश अपने लिए रोक रहा था। हमारे लिए समस्या थी की दुनिया की सप्लाई चैन अगर हमारे लिए काम नहीं करेगी तो हम वैक्सीन कैसे बनाएंगे। ऐसे में PM ने अमेरिकी राष्ट्रपति को समझाया कि आप दुनिया के वैक्सीन सप्लाई चैन को मत रोकिए। प्रधानमंत्री के कहने पर अमेरिकी प्रशासन ने भारत को रक्षा उत्पादन अधिनियम में छूट दी और उसके कारण हमारा वैक्सीन कार्यक्रम सुचारू रूप से चला। डेल्टा वेरिएंट का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे देश में हुआ। उस समय पूरी दुनिया से दवाइयां, वेंटिलेटर आदि चीजें आई। उस समय ऑक्सीजन की भी बहुत कमी थी तो हमने बाहर से ऑक्सीजन मंगाया था। उस समय PM की दूर दृष्टि थी कि उन्होंने कहा कि वैक्सीन के समय हम दुनिया की मदद करें।